देश की बेटियों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के उद्देश्य से शुरू की गई सुकन्या समृद्धि योजना (SSY) ने आज अपने 11 वर्ष पूरे कर लिए हैं। बीते एक दशक में यह योजना केवल एक बचत विकल्प नहीं रही, बल्कि करोड़ों परिवारों के लिए बेटियों के उज्ज्वल और सुरक्षित भविष्य की भरोसेमंद आधारशिला बन चुकी है।
2015 में हुई थी योजना की शुरुआत
22 जनवरी 2015 को केंद्र सरकार ने ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ अभियान के तहत इस योजना को लागू किया था। इसका मकसद अभिभावकों को बेटियों की शिक्षा, स्वास्थ्य और आत्मनिर्भरता के लिए समय रहते वित्तीय योजना बनाने के लिए प्रेरित करना था। समय के साथ यह योजना देशभर में लोकप्रिय होती चली गई।
4.5 करोड़ से ज्यादा खाते, बढ़ता भरोसा
22 जनवरी 2026 तक सुकन्या समृद्धि योजना के अंतर्गत 4.53 करोड़ से अधिक खाते खोले जा चुके हैं। यह आंकड़ा दर्शाता है कि अब परिवार बेटियों के भविष्य को लेकर पहले से अधिक जागरूक और जिम्मेदार हो चुके हैं। दिसंबर 2025 तक इस योजना में कुल जमा राशि 3.33 लाख करोड़ रुपये से अधिक पहुंच चुकी है।
8.2% ब्याज के साथ सुरक्षित निवेश
फिलहाल सुकन्या समृद्धि योजना में 8.2 प्रतिशत वार्षिक ब्याज दिया जा रहा है, जो बेटियों के लिए बनी सरकारी योजनाओं में सबसे आकर्षक दरों में शामिल है। इसमें जमा राशि और उस पर मिलने वाला ब्याज पूरी तरह भारत सरकार की गारंटी के अंतर्गत सुरक्षित रहता है, जिससे यह जोखिम रहित निवेश विकल्प बनता है।
शिक्षा और विवाह के खर्च में सहारा
यह योजना खास तौर पर बेटियों की उच्च शिक्षा और विवाह से जुड़े खर्चों को ध्यान में रखकर बनाई गई है। इसका उद्देश्य लड़कियों को आर्थिक मजबूती देना और महिला सशक्तीकरण को बढ़ावा देना है, ताकि वे भविष्य में आत्मनिर्भर बन सकें।
खाता कौन और कैसे खोल सकता है
बेटी के माता-पिता या कानूनी अभिभावक डाकघर या किसी अधिकृत बैंक शाखा में सुकन्या समृद्धि खाता खोल सकते हैं। यह खाता बच्ची के जन्म से लेकर 10 वर्ष की आयु तक खोला जा सकता है।
हर बेटी के लिए एक ही खाता मान्य होता है। एक परिवार अधिकतम दो खाते खोल सकता है, हालांकि जुड़वां या तीन बेटियों के मामले में विशेष छूट दी जाती है। यह खाता पूरे देश में कहीं भी ट्रांसफर किया जा सकता है।
जमा राशि और निकासी के नियम
इस योजना में सालाना न्यूनतम 250 रुपये और अधिकतम 1.5 लाख रुपये तक जमा किए जा सकते हैं। खाता खुलने की तारीख से 15 साल तक निवेश किया जाता है। ब्याज की गणना मासिक आधार पर होती है और साल के अंत में खाते में जोड़ दी जाती है।
बेटी के 18 वर्ष पूरे होने या 10वीं कक्षा उत्तीर्ण करने के बाद शिक्षा के लिए खाते से 50 प्रतिशत तक राशि निकाली जा सकती है।
21 साल में परिपक्वता, टैक्स में भी लाभ
सुकन्या समृद्धि खाता 21 साल बाद परिपक्व होता है। विशेष परिस्थितियों जैसे बेटी की शादी (18 साल के बाद) या दुर्भाग्यवश मृत्यु होने पर ही समय से पहले खाता बंद किया जा सकता है। पहले पांच वर्षों में खाता बंद करने की अनुमति नहीं होती।
उच्च ब्याज दर, कर छूट और सुरक्षित निवेश के कारण यह योजना बेटियों के लिए सबसे प्रभावी दीर्घकालिक बचत विकल्पों में गिनी जाती है।
बेटियों के सपनों को देती है आर्थिक उड़ान
सुकन्या समृद्धि योजना न सिर्फ बचत की आदत को बढ़ावा देती है, बल्कि बेटियों को शिक्षा और आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ने का मजबूत आर्थिक आधार भी प्रदान करती है। यही वजह है कि 11 वर्षों में यह योजना देश की सबसे भरोसेमंद सामाजिक योजनाओं में शामिल हो चुकी है।