माँ… मैं एक माँ हूँ। कैसे कह सकती हूँ कि मुझे कुछ चाहिए?  …क्यों मुझे कभी कुछ नहीं चाहिए होता… सिर्फ बच्चों की खुशी के अलावा? : लेखिका-डॉक्टर अनुराधा बक्शी “अनु” अधिवक्ता

डॉक्टर अनुराधा बक्शी “अनु” अधिवक्ता लोकतन्त्र प्रहरी के दैनिक पाठक द्वारा भेजे गए पत्र से.. “मांगूंगी…

कितना निर्दयी है तू… कभी-कभी तू भी कितना निर्दयी हो जाता है, एक माँ के आँचल से उसका बेटा छीन ले जाता है.. : डॉ. अरुण मिश्रा

डॉ. अरुण मिश्रा लोकतन्त्र प्रहरी के दैनिक पाठक द्वारा भेजे गए पत्र से.. 🌹 श्रद्धांजलि 🌹…

कितना भी करले जतन, सब यहीं धरा रह जाएगा, छींक की तरह आयेगी मौत, रुमाल जेब में रह जाएगा : डॉ. अरुण मिश्रा

डॉ. अरुण मिश्रा लोकतन्त्र प्रहरी के दैनिक पाठक द्वारा भेजे गए पत्र से.. -:सब धरा रह…

अलविदा मत कहो दोस्तों…अभी तो बाकी है जिंदगी का फ़लसफा: डॉ. अरुण मिश्रा

डॉ. अरुण मिश्रा लोकतन्त्र प्रहरी के दैनिक पाठक द्वारा भेजे गए पत्र से.. अलविदा मत कहो…