सिस्टम की मार: दुर्ग जनपद में प्रधानमंत्री आवास के 353 पात्र हितग्राही ‘ब्लैकलिस्ट’, सपना टूटने की कगार पर

दुर्ग। जनपद पंचायत दुर्ग के अंतर्गत आने वाली करीब 47 ग्राम पंचायतों में प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) को लेकर एक बड़ा तकनीकी संकट खड़ा हो गया है। योजना के क्रियान्वयन के लिए उपयोग किए जा रहे ‘आवास प्लस ऐप’ के सिस्टम ने दुर्ग जनपद के लगभग 353 पात्र हितग्राहियों के नाम स्वतः ही ‘अपात्र’ श्रेणी में डाल दिए हैं। ताज्जुब की बात यह है कि ये वे हितग्राही हैं जो योजना के निर्धारित 13 बिंदुओं के पात्रता नियमों को पूरी तरह पूरा करते हैं, फिर भी सिस्टम ने इन्हें बाहर कर दिया है।
इस मामले को लेकर बुधवार को हितग्राही जनदर्शन में समस्या बताने कलेक्ट्रेट पहुंचे।
और उन्होंने कलेक्टर को अपनी समस्या बताई।

संशोधन का कोई विकल्प नहीं

बता दें,सबसे बड़ी समस्या यह है कि एक बार सिस्टम द्वारा अपात्र घोषित किए जाने के बाद, वर्तमान व्यवस्था में इन नामों के संशोधन या पुनः स्वीकृति का कोई विकल्प मौजूद नहीं है। शासन-प्रशासन के स्तर पर इन ‘ब्लैकलिस्टेड’ (काली सूची) नामों के समाधान के लिए अब तक कोई ठोस व्यवस्था नहीं की गई है। इसके कारण न केवल दुर्ग जनपद, बल्कि पूरे जिले के हजारों अति-जरूरतमंद परिवारों का पक्का मकान पाने का सपना टूटता नजर आ रहा है।

सफलता पर खड़े हो रहे प्रश्नचिन्ह

स्थानीय लोगों और जानकारों का कहना है कि एक तरफ सरकार शत-प्रतिशत आवास निर्माण का लक्ष्य लेकर चल रही है, वहीं दूसरी ओर सिस्टम की इस गंभीर त्रुटि के कारण पात्र लोगों को योजना से वंचित किया जा रहा है। यदि समय रहते ‘आवास प्लस ऐप’ में सुधार या डेटा करेक्शन की अनुमति नहीं दी गई, तो योजना की सफलता पर प्रश्नचिन्ह लगना तय है।

ग्रामीणों में बढ़ता आक्रोश

इस तकनीकी गड़बड़ी के कारण उन गरीब परिवारों में भारी निराशा है जो बरसों से कच्चे मकानों में रहकर पक्के घर की आस लगाए बैठे थे। जनपद स्तर पर अधिकारी भी इस मामले में असहाय नजर आ रहे हैं क्योंकि डेटा का नियंत्रण सीधे केंद्रीय सर्वर से होता है। अब गेंद राज्य और केंद्र सरकार के पाले में है कि क्या वे इन ‘तकनीकी रूप से अपात्र’ कर दिए गए पात्र हितग्राहियों के लिए कोई विशेष विंडो खोलते हैं या नहीं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *