तिरुपति बालाजी: मंदिर के 5 रहस्यों का खुलासा—भगवान को साड़ी और धोती पहनाने की अनोखी परंपरा क्यों?

Balaji Temple Secrets :– देशभर में मौजूद प्राचीन मंदिरों में तिरुमला स्थित तिरुपति बालाजी मंदिर अपनी आस्था के साथ-साथ अद्भुत मान्यताओं और रहस्यमयी परंपराओं के लिए विशेष पहचान रखता है। भगवान वेंकटेश्वर को समर्पित यह पवित्र स्थल हर दिन लाखों भक्तों की श्रद्धा का केंद्र बनता है। वर्षों से यहां जुड़े अनेक रहस्य लोगों की उत्सुकता बढ़ाते आए हैं। आइए जानते हैं मंदिर से जुड़े कुछ प्रमुख अनकहे तथ्य—

दही-चावल का विशेष नैवेद्यम

तिरुपति में प्रसाद के रूप में मिलने वाला प्रसिद्ध लड्डू तो विश्वभर में मशहूर है, लेकिन कम लोग जानते हैं कि मंदिर में सबसे पहले भगवान को दही-चावल का भोग लगाया जाता है। एक प्राचीन कथा के अनुसार, एक भक्त की भक्ति से प्रसन्न होकर यह परंपरा आरंभ हुई और आज भी यह नियम निरंतर निभाया जाता है।

बाल दान की अनोखी परंपरा

मंदिर परिसर में बाल दान की परंपरा सदियों-old मानी जाती है। धार्मिक मान्यता है कि भगवान वेंकटेश्वर ने कलयुग में कुछ कार्यों हेतु धन का उपयोग किया था और भक्त अपनी मनोकामना पूरी होने पर “कर्ज उतारने” के प्रतीक के रूप में अपने बाल समर्पित करते हैं। यह आस्था आज भी वैसी ही कायम है और हर वर्ष लाखों श्रद्धालु बाल दान करते हैं।

धोती और साड़ी पहनाने की परंपरा

बालाजी की प्रतिमा को विशेष रूप से दोनों प्रकार के वस्त्र — धोती और साड़ी — पहनाए जाते हैं। मान्यता है कि इस दिव्य मूर्ति में भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी दोनों के स्वरूप का आशीष है, इसलिए प्रतिमा को स्त्री और पुरुष दोनों के परिधान अर्पित किए जाते हैं।

प्रतिमा पर मौजूद प्राकृतिक बाल

मंदिर की प्रतिमा पर लगे बाल हमेशा से लोगों के लिए आश्चर्य का विषय रहे हैं। कहा जाता है कि ये बाल न तो उलझते हैं, न ही इनमें कभी सफेदी दिखाई देती है। प्रतिमा की यह विशेषता भक्तों को हमेशा से आकर्षित करती आई है।

गर्मियों में पसीना आने का चमत्कार

मंदिर के पुजारियों के अनुसार, गर्मियों के दिनों में भगवान वेंकटेश्वर की प्रतिमा पर पसीना जैसी नमी देखी जाती है। इसे दिव्य चमत्कार माना जाता है और यह दृश्य दर्शन करने वालों के लिए आस्था का अद्भुत अनुभव बन जाता है।

दीपक जो कभी बुझता नहीं

मंदिर के गर्भगृह के पास एक दीपक निरंतर जलता रहता है। मान्यता है कि इस दीपक को किसी साधारण तेल या घी से नहीं भरा जाता, फिर भी यह लगातार प्रज्ज्वलित रहता है। यह भी मंदिर के प्रमुख रहस्यों में से एक माना जाता है।

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