’53 लाख MT पेट्रोलियम उपलब्ध, अब 41 देशों से कर रहे एनर्जी इंपोर्ट’; लोकसभा में बोले PM मोदी….

अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच चल रही जंग के बाद पश्चिम एशिया में आए संकट को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज सोमवार (23 मार्च, 2026) को लोकसभा में कहा कि भारत ने इन हमलों का विरोध किया है और होर्मुज स्ट्रेट में रुकावट अस्वीकार्य है।

पीएम मोदी ने कहा कि भारत की स्पष्ट भूमिका है कि पश्चिम एशिया में तनाव खत्म होना चाहिए। भारत शांतिपूर्ण समाधान के पक्ष है और नागरिकों और पावर प्लांट पर हमले मंजूर नहीं हैं। आइए जानते हैं, पीएम मोदी के संबोधन की बड़ी बातें-

सरकार का किस बात पर रहा फोकस?

पीएम मोदी ने कहा कि सरकार संवेदनशील भी है, सतर्क भी है और हर सहायता के लिए तत्पर भी है। भारत में बड़ी मात्रा में कच्चा तेल, गैस और फर्टिलाइजर जैसी अनेक जरूरी चीजें हॉर्मुज स्ट्रेट के रास्ते से आती हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि युद्ध के बाद से ही हॉर्मुज स्ट्रेट से जहाजों का आना जाना बहुत चुनौतीपूर्ण हो गया है। इसके बावजूद हमारी सरकार का प्रयास रहा है कि पेट्रोल, डीजल और गैस की सप्लाई बहुत ज्यादा प्रभावित न हो… इस पर हमारा फोकस रहा है।

भारत के सामने कौन-कौन सी चुनौतियां?

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत के सामने भी इस युद्ध ने अप्रत्याशित चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। ये चुनौतियां आर्थिक भी हैं, राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी भी हैं और मानवीय भी हैं। युद्धरत और युद्ध से प्रभावित देशों के साथ भारत के व्यापक व्यापारिक रिश्ते हैं।

उन्होंने कहा कि जिस क्षेत्र में ये युद्ध हो रहा है, वह दुनिया के दूसरे देशों के साथ हमारे व्यापार का भी एक महत्वपूर्ण रास्ता है। विशेष रूप से कच्चे तेल और गैस की हमारी जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा यही क्षेत्र पूरा करता है।

भारतीयों की सुरक्षा के लिए क्या कदम उठाए?

पीएम मोदी ने कहा कि हमारे मिशन नियमित रूप से एडवाइजरी जारी कर रहे हैं। यहां भारत में और अन्य प्रभावित देशों में 24×7 कंट्रोल रूप और आपातकालीन हेल्पलाइन स्थापित की गई हैं। इनके माध्यम से सभी प्रभावितों को त्वरित जानकारी दी जा रही है।

उन्होंने बताया कि संकट की इस स्थिति में देश-विदेश में भारतीयों की सुरक्षा हमारी बहुत बड़ी प्राथमिकता रही है। युद्ध शुरू होने के बाद से अब तक 3 लाख, 75 हजार से अधिक भारतीय सुरक्षित भारत पहुंच चुके हैं।

संकट के समय भारत क्या करने वाला है?

प्रधानमंत्री ने संसद में बताया कि बीते दशक में भारत ने संकट के ऐसे ही समय के लिए कच्चे तेल के भंडारण को भी प्राथमिकता दी है। आज भारत के पास 53 लाख मीट्रिक टन से अधिक का स्ट्रेटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व है और 65 लाख मीट्रिक टन से अधिक के रिजर्व की व्यवस्था पर देश काम कर रहा है। बीते 11 वर्षों में हमारी रिफाइनरी कैपेसिटी में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। सरकार अलग अलग देशों के सप्लायर्स के साथ भी लगातार संपर्क में है।

भारत की क्या तैयारी है?

पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा कि बीते दिनों हॉर्मुज स्ट्रेट में फंसे हमारे कई जहाज भारत आए भी हैं। संकट के इस समय में देश की एक और तैयारी भी है, जो बहुत काम आ रही है। पिछले 11 साल में इथेनॉल के उत्पादन और उसकी ब्रॉन्डिग पर अभूतपूर्व काम हुआ है।

उन्होंने कहा कि एक दशक पहले तक देश में सिर्फ एक से डेढ़ प्रतिशत इथेनॉल बैंडिंग कैपसिटी थी। आज हम पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल बैंडिंग के करीब पहुंच रहे हैं। इसके कारण प्रति वर्ष करीब साढ़े 4 करोड़ बैरल कम ऑयल इम्पोर्ट करना पड़ रहा है।

खेती पर कैसा पड़ेगा प्रभाव?

लोकसभा में पीएम ने कहा कि एक बड़ा सवाल ये है कि युद्ध का खेती पर क्या प्रभाव होगा। देश के किसानों ने हमारे अन्न के भंडार भर रखे हैं, इसलिए भारत के पास पर्याप्त खाद्यान्न है। हमारा ये भी प्रयास है कि खरीफ सीजन की ठीक से बुआई हो सके। सरकार ने बीते सालों में आपात स्थिति से निपटने के लिए खाद की पर्याप्त व्यवस्था भी की है।

युद्ध का चैलेंज

उन्होंने कहा कि युद्ध का एक बहुत बड़ा चैलेंज ये भी है कि भारत में गर्मी का मौसम शुरू हो रहा है। आने वाले समय में बढ़ती गर्मी के साथ बिजली की डिमांड बढ़ती जाएगी। फिलहाल देश के सभी पावर प्लांट्स में कोल स्टॉक उपलब्ध है। भारत ने लगातार दूसरे साल 100 करोड़ टन कोयला उत्पादन करने का रिकॉर्ड बनाया है। पावर जेनेरेशन से लेकर पावर सप्लाई तक की हमारे सभी सिस्टम की निरंतर मॉनिटरिंग भी की जा रही है।

दुनिया में एकजुटता की जाए आवाज

प्रधानमंत्री ने कहा कि ये आवश्यक है कि भारत की संसद से इस संकट को लेकर एकमत और एकजुट आवाज दुनिया में जाए। जबसे ये युद्ध शुरू हुआ है, तबसे ही प्रभावित क्षेत्रों में हर भारतीय को जरूरी मदद दी जा रही है। मैंने खुद पश्चिम एशिया के ज्यादातर राष्ट्राध्यक्षों के साथ दो राउंड फोन पर बात की है। सभी ने भारतीयों की सुरक्षा का पूरा आश्वासन दिया है। दुर्भाग्य से इस दौरान कुछ लोगों की दुखद मृत्यु हुई है और कुछ लोग घायल हुए हैं। ऐसे मुश्किल हालात में परिवारजनों को मदद दी जा रही है।

कितने देशों से हो रहा ईंधन का आयात?

पीएम नरेंद्र मोदी ने बताया कि पहले 27 देशों से आयात होता था अब 41 देशों से होता है। तेल की चुनौती से निपटने के लिए साथ ही लॉन्ग टर्म और शॉर्ट टर्म प्लान पर काम हो रहा है। हमने एस मिनिस्ट्रियल ग्रुप बनाया है।

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