अहमदाबाद: देश की सबसे महत्वाकांक्षी बुलेट ट्रेन परियोजना, अहमदाबाद–मुंबई हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर, अब लागत में भारी वृद्धि और कुछ देरी के बावजूद अपनी रफ्तार पकड़ रही है। शुरुआती अनुमान के अनुसार, इस परियोजना को पूरा करने का बजट लगभग 1.1 लाख करोड़ रुपये था, लेकिन अब इसकी अनुमानित लागत बढ़कर 1.98 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गई है, यानी शुरुआती बजट से लगभग 83% ज्यादा।
रेलवे बोर्ड की पुष्टि
रेलवे बोर्ड के चेयरमैन और सीईओ सतीश कुमार ने ‘प्रगति’ पहल के तहत ब्रीफिंग में बताया कि लागत बढ़ने का मामला अभी अंतिम अनुमोदन के चरण में है। उन्होंने कहा कि संशोधित लागत को अगले 1–2 महीनों में अंतिम रूप दिया जा सकता है। परियोजना में देरी के मुख्य कारण भूमि अधिग्रहण में बाधाएं, कानूनी मंजूरियों में समय और ट्रेन सेट (रोलिंग स्टॉक) के चयन में हुई देरी हैं।
अब तक की प्रगति
रेलवे के अनुसार, 30 नवंबर तक परियोजना का भौतिक काम 55.6% और वित्तीय प्रगति 69.6% पूरी हो चुकी है। अब तक इस पर कुल 85,801 करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले महीने ही मंत्रालय की समीक्षा कर परियोजना को तेजी से पूरा करने के निर्देश दिए थे।
तकनीकी उपलब्धियां
हाल ही में रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से महाराष्ट्र के पालघर जिले में 1.5 किलोमीटर लंबी पर्वतीय सुरंग (माउंटेन टनल-5) का ‘ब्रेकथ्रू’ देखा। यह सुरंग विरार और बोईसर स्टेशनों के बीच स्थित है और इसे इंजीनियरिंग की बड़ी सफलता माना जा रहा है। इससे पहले सितंबर 2025 में ठाणे और बीकेसी के बीच 5 किलोमीटर लंबी भूमिगत सुरंग का काम भी पूरा किया जा चुका है।
भविष्य की योजना
यह हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर 320 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलने के लिए डिजाइन किया गया है। भविष्य में जापान की E10 शिंकानसेन ट्रेनें भी इस मार्ग पर दौड़ सकेंगी। परियोजना पर्यावरण के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि सड़क परिवहन की तुलना में इससे कार्बन उत्सर्जन में 95% की कमी आएगी।
योजना के अनुसार, सूरत से बिलीमोरा तक पहला चरण अगस्त 2027 तक शुरू होगा, जबकि पूरा 508 किलोमीटर का कॉरिडोर दिसंबर 2029 तक तैयार होने की उम्मीद है।