नई दिल्ली : भारत में जहरीले कफ सिरप के कारण 20 बच्चों की मौत ने पूरे देश और विश्व में चिंता पैदा कर दी है। अब विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने इस हादसे की वजह का खुलासा किया है। WHO के अनुसार इस त्रासदी की जड़ भारतीय दवा कंपनियों द्वारा अनिवार्य परीक्षणों में गंभीर चूक है। संगठन ने चेतावनी दी है कि भले ही ये सिरप फिलहाल सिर्फ भारत में बेचे गए हों, लेकिन इनके अनौपचारिक रूप से विदेशों में पहुँचने का खतरा बना हुआ है।
इस घटना की शुरुआत तब हुई जब ‘कोल्डरिफ (Coldrif)’ कफ सिरप में डायएथिलीन ग्लाइकॉल (DEG) नामक रसायन मानक सीमा से लगभग 500 गुना अधिक पाया गया। इसके बाद जांच में दो और सिरप – ‘रेस्पिफ्रेश (Respifresh)’ और ‘रिलीफ (RELIFE)’ – में भी वही जहरीला रसायन मिला। WHO ने स्पष्ट किया कि यह रसायन किडनी फेलियर और न्यूरोलॉजिकल समस्याओं का कारण बन सकता है, जिससे बच्चों की मौत हो सकती है।
WHO की रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारतीय कानून के तहत दवा के हर बैच का परीक्षण अनिवार्य है, लेकिन हाल ही में फैक्ट्रियों की जांच में कई गंभीर खामियां सामने आईं। यह घटना भारत की दवा निर्माण क्षमता और विश्व स्तर पर उसकी प्रतिष्ठा के लिए गंभीर धक्का है। भारत अमेरिका में इस्तेमाल होने वाली 40% जेनेरिक दवाओं और कई अफ्रीकी देशों की 90% दवा जरूरतें पूरी करता है, जिससे इस हादसे ने वैश्विक चिंता बढ़ा दी है।
‘कोल्डरिफ’ बनाने वाली श्रेसन फार्मास्यूटिकल्स की फैक्ट्री को बंद कर दिया गया है और पुलिस ने गैर-इरादतन हत्या के तहत जांच शुरू की है। वहीं ‘रेस्पिफ्रेश’ और ‘रिलीफ’ बनाने वाली शेप फार्मा और रेडनेक्स फार्मास्यूटिकल्स को उत्पादन और बिक्री रोकने का आदेश दिया गया है।
इस गंभीर लापरवाही के बाद WHO और भारतीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने अभिभावकों के लिए सख्त चेतावनी जारी की है। उन्होंने कहा है कि माता-पिता अपने बच्चों के लिए किसी भी तरह की खांसी और सर्दी की दवाओं का उपयोग न करें, जब तक कि उनकी सुरक्षा और परीक्षण की पुष्टि न हो।