नई दिल्ली। कांग्रेस ने भारत द्वारा रूस से कच्चे तेल के आयात के मामले में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हालिया बयान को लेकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर निशाना साधा है। मुख्य विपक्षी दल ने दावा किया कि पीएम मोदी ट्रंप से डर गए हैं और उन्होंने अपने महत्वपूर्ण निर्णय ‘आउटसोर्स’ कर अमेरिका को सौंप दिए। कांग्रेस ने मोदी सरकार की विदेश नीति पर गंभीर सवाल उठाए और इसे “पूरी तरह ध्वस्त” बताया।
कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा कि भारत ने रूस से तेल नहीं खरीदने का निर्णय ट्रंप की घोषणा पर छोड़ दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री ने कई मामलों में ट्रंप को व्यक्तिगत आश्वासन दिया और अमेरिकी राष्ट्रपति की प्रशंसा में ट्वीट्स भी किए। राहुल गांधी ने यह भी दावा किया कि वित्त मंत्री का अमेरिका दौरा रद्द कर दिया गया और शर्म अल-शेख शिखर सम्मेलन में भी भारत की भागीदारी सीमित रही।
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि ऐसे प्रतीत होता है कि भारत के मुख्य रणनीतिक और आर्थिक फैसले अमेरिका पर निर्भर हो गए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि विदेश नीति अब घरेलू राजनीतिक ध्रुवीकरण का साधन बन गई है और इससे देश की सुरक्षा और वैश्विक छवि पर गंभीर असर पड़ रहा है।
रमेश ने आगे कहा कि विदेश नीति पर सर्वदलीय सहमति और पारदर्शिता की आवश्यकता है। उन्होंने सुझाव दिया कि सरकार को या तो सर्वदलीय बैठक बुलानी चाहिए या विपक्षी नेताओं के साथ अलग-अलग बैठक कर विश्वास में लेना चाहिए।
इस बीच, भारत सरकार ने स्पष्ट किया है कि देश अपनी ऊर्जा सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए ऊर्जा स्रोतों को विविध और स्थिर बनाने की दिशा में काम कर रहा है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारतीय उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करना सरकार की निरंतर प्राथमिकता है और ऊर्जा नीतियां इसी उद्देश्य से संचालित होती हैं।
कांग्रेस के आरोपों के बावजूद सरकार का कहना है कि विदेश नीति निर्णय भारतीय हितों और बाजार की वास्तविकताओं के अनुरूप लिए जाते हैं, न कि किसी विदेशी दबाव में।