रायपुर। गोवर्धन पूजा के पावन अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास गौशाला में गौमाता की पूजा-अर्चना की और पारंपरिक रूप से खिचड़ी का भोग अर्पित कर गोसेवा की परंपरा निभाई। इस मौके पर उन्होंने प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि, शांति और खुशहाली की कामना की।
प्रकृति और गौवंश के प्रति आभार
मुख्यमंत्री ने कहा कि गोवर्धन पूजा प्रकृति, गौवंश और पर्यावरण के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का पर्व है। उन्होंने प्रदेशवासियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा, “गाय भारतीय संस्कृति की आधारशिला है, जो हमारी आस्था, अर्थव्यवस्था और ग्रामीण जीवन का केंद्र है।”
गौसेवकों का सम्मान और संवाद
पूजा-अर्चना के बाद मुख्यमंत्री ने गौशाला में सेवा कर रहे गौसेवकों को मिठाई खिलाकर सम्मानित किया। उन्होंने गौसेवकों की निष्ठा और सेवा भावना की सराहना की और समाज के सभी वर्गों से गौवंश की रक्षा और संरक्षण के लिए आगे आने का आग्रह किया। मुख्यमंत्री ने गौशाला की व्यवस्थाओं का भी जायजा लिया, जहां उपस्थित गौसेवकों ने बताया कि गौवंश की देखभाल के लिए सभी आवश्यक सुविधाएँ उपलब्ध हैं।
संस्कृति, अन्न और धरती का सम्मान
मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ की मिट्टी में गोसेवा और प्रकृति पूजन की भावना गहराई से रची-बसी है। उन्होंने कहा, “गाय, अन्न और धरती का सम्मान करना उस मातृशक्ति को प्रणाम करना है, जिससे हमारा जीवन जुड़ा है। जब हम इन्हें नमन करते हैं, तब हम अपनी संस्कृति की जड़ों और समृद्धि के स्रोतों को स्पर्श करते हैं।”
गोवर्धन पूजा के इस अवसर पर मुख्यमंत्री का यह संदेश संस्कृति, पर्यावरण और गौवंश के संरक्षण की महत्वता को उजागर करता है और समाज के सभी वर्गों को पर्यावरण और जीव-जंतुओं के प्रति संवेदनशील होने की प्रेरणा देता है।