नई दिल्ली। देश में बिक रही दवाओं की गुणवत्ता को लेकर केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) की ताज़ा रिपोर्ट ने चौंकाने वाले तथ्य उजागर किए हैं। जांच में कुल 112 दवाओं के सैंपल गुणवत्ता परीक्षण में फेल पाए गए हैं। इनमें पंजाब में निर्मित 11 दवाएं भी शामिल हैं, जिससे राज्य की कई फार्मा इकाइयों पर सवाल उठे हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, केंद्र सरकार की लैब्स में जांची गई 52 दवाएं और राज्य स्तरीय प्रयोगशालाओं में जांची गई 60 दवाएं मानकों पर खरी नहीं उतरीं। फेल हुई दवाओं में सबसे अधिक 49 हिमाचल प्रदेश, 16 गुजरात, 12 उत्तराखंड, 11 पंजाब और 6 मध्य प्रदेश की हैं।
स्वास्थ्य मंत्रालय के अधिकारियों ने बताया कि पंजाब की जिन 11 दवाओं के सैंपल फेल हुए हैं, उन कंपनियों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है। साथ ही, संबंधित दवा बैचों को बाजार से वापस बुलाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
अधिकारियों ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर फार्मा उद्योगों पर निगरानी बढ़ा रही हैं, ताकि निम्न गुणवत्ता या नकली दवाओं की बिक्री पर अंकुश लगाया जा सके। उपभोक्ताओं को सलाह दी गई है कि वे दवाएं केवल प्रमाणित विक्रेताओं से ही खरीदें।
गुणवत्ता परीक्षण में फेल हुई पंजाब निर्मित 11 दवाएं:
- Agen-20 (Rabeprazole Tablets IP) – मोहाली
- Penzol-40 (Pantoprazole Gastro-Resistant Tablets IP 40mg) – मोहाली
- Raxofen (Ibuprofen & Paracetamol Tablets IP) – मोहाली
- Podoram (Cefpodoxime Tablets IP 200mg) – गुरदासपुर
- Cyproheptadine Tablets IP 4mg – गुरदासपुर
- Loperamide Hydrochloride Capsules IP 2mg – गुरदासपुर
- Penzol (Pantoprazole Sodium Tablets IP) – गुरदासपुर
- Amlocare-AT (Amlodipine & Atenolol Tablets) – मोहाली
- Amoxicillin & Potassium Clavulanate Tablets IP – मोहाली
- Fecopod (Cefpodoxime Proxetil Tablets 200mg) – डेराबस्सी
- Unnamed Sample under Evaluation – पंजाब
रिपोर्ट के बाद केंद्र सरकार ने राज्यों को निर्देश दिया है कि संदिग्ध दवाओं की बिक्री और वितरण पर तत्काल रोक लगाई जाए तथा फार्मा इकाइयों के नियमित निरीक्षण को अनिवार्य बनाया जाए।