बस्तर जिले में 25 वर्षों में स्वास्थ्य सुविधाओं का उल्लेखनीय विकास, स्वास्थ्य क्रांति से लाखों जीवन हुए सुरक्षित

जगदलपुर। छत्तीसगढ़ राज्य गठन के बाद बीते 25 वर्षों में बस्तर संभाग ने स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में अद्भुत प्रगति की है। जो क्षेत्र कभी स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी से जूझता था, आज वहां आधुनिक अस्पताल, मेडिकल कॉलेज और सुपर स्पेशियलिटी सेंटर जैसी विश्वस्तरीय सुविधाएं संचालित हो रही हैं। ग्रामीण और नक्सल प्रभावित इलाकों में भी अब प्राथमिक से लेकर उच्चस्तरीय स्वास्थ्य सेवाएं सुलभ हैं, जिससे बस्तर के लाखों लोगों को राहत मिली है।

स्व. बलीराम कश्यप स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय बना स्वास्थ्य परिवर्तन का प्रतीक
वर्ष 2006 में स्थापित स्व. बलीराम कश्यप स्मृति शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय बस्तर के स्वास्थ्य ढांचे की रीढ़ बन चुका है। प्रारंभ में 50 सीटों से शुरू हुआ यह संस्थान अब विशेषज्ञ डॉक्टरों और अत्याधुनिक संसाधनों से सुसज्जित है। 2018 में नए भवन में स्थानांतरण के बाद कॉलेज की क्षमता और सेवाएं कई गुना बढ़ गईं। यहां प्रदेश का एकमात्र वायरोलॉजी लैब संचालित है, जो महामारी जैसी परिस्थितियों में अहम भूमिका निभा रहा है।

डिमरापाल का सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल — बस्तर को मिली विश्वस्तरीय सुविधा
जगदलपुर के डिमरापाल में निर्मित सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल अब संचालन के लिए तैयार है। इस अस्पताल में हृदय, गुर्दा और न्यूरो रोगों के लिए विशेष उपचार उपलब्ध होगा। यह संस्थान बस्तर के लोगों को बड़े शहरों की यात्रा के बिना उच्च गुणवत्ता वाली चिकित्सा सुविधा देगा, जिससे समय और खर्च दोनों की बचत होगी।

महारानी अस्पताल — परंपरा और आधुनिकता का संगम
1937 में स्थापित महारानी अस्पताल बस्तर की सबसे पुरानी चिकित्सा संस्था है, जिसने समय के साथ खुद को आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित किया है। 500 बिस्तरों वाले इस अस्पताल में अब डिजिटल एक्स-रे, आईसीयू, मॉड्यूलर ऑपरेशन थिएटर, धन्वंतरी ओपीडी, और कादम्बिनी मातृ-शिशु स्वास्थ्य संस्थान जैसी सुविधाएं हैं। यहां रोजाना 700-800 मरीजों की ओपीडी, 40-45 भर्ती मरीज, और 2,200 से अधिक पैथोलॉजी जांचें होती हैं। अस्पताल ने कायाकल्प और एनक्यूएएस जैसे राष्ट्रीय पुरस्कार भी जीते हैं।

ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार
पिछले दो दशकों में बस्तर जिले में सामुदायिक और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। अब हर 20-30 हजार आबादी पर एक स्वास्थ्य केंद्र मौजूद है। उप स्वास्थ्य केंद्रों की संख्या में भी 60% तक की वृद्धि हुई है, जिससे हर गांव तक बुनियादी चिकित्सा सेवाएं पहुंच रही हैं।

कोविड काल में बस्तर की मजबूती
कोविड-19 महामारी के दौरान बस्तर की स्वास्थ्य व्यवस्था ने उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। ऑक्सीजन प्लांट, कोविड अस्पताल और वैक्सीनेशन अभियान ने बस्तर को स्वास्थ्य सुरक्षा के नए मानकों पर खड़ा किया।

राज्य सरकार का लक्ष्य — “हर गांव, बेहतर स्वास्थ्य”
राज्य सरकार की नीतियों और निवेश के कारण बस्तर में स्वास्थ्य सुविधाओं का दायरा लगातार बढ़ रहा है। टेलीमेडिसिन, आयुष्मान कार्ड, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं और एम्बुलेंस नेटवर्क ने ग्रामीण जनता को स्वास्थ्य के प्रति सशक्त बनाया है। आने वाले वर्षों में सरकार का लक्ष्य है — “हर बस्तरवासी को गांव के पास ही गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा मिले।”

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