वाराणसी : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार की शाम दो दिवसीय दौरे पर अपने संसदीय क्षेत्र काशी पहुंचे, जहां उनका स्वागत अभूतपूर्व उत्साह के साथ किया गया। जैसे ही प्रधानमंत्री का विशेष विमान शाम करीब 5 बजे लाल बहादुर शास्त्री अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे बाबतपुर पर उतरा, पूरा परिसर ‘हर-हर महादेव’ और ‘मोदी-मोदी’ के नारों से गूंज उठा। प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हवाई अड्डे पर स्वयं पहुंचकर प्रधानमंत्री का भव्य स्वागत किया।
एयरपोर्ट से सड़क मार्ग द्वारा बीएलडब्ल्यू स्थित गेस्ट हाउस की ओर रवाना होते समय प्रधानमंत्री के काफिले का मार्ग एक जनसैलाब में बदल गया। बाबतपुर से हरहुआ, गिलट बाजार, जेपी मेहता, फुलवरिया फ्लाईओवर और बरेका तक हजारों की संख्या में लोग अपने नेता के स्वागत के लिए सड़कों पर उमड़ पड़े। जगह-जगह फूलों की वर्षा, ढोल-नगाड़ों की थाप और भारत माता के जयघोष के बीच प्रधानमंत्री ने भी हाथ हिलाकर जनता का अभिवादन किया। पूरा मार्ग केसरिया और तिरंगे रंग की रोशनी से जगमगा उठा, जिससे बनारस एक उत्सव स्थल में तब्दील हो गया।
प्रधानमंत्री मोदी शनिवार, 8 नवंबर को वाराणसी से देश को चार नई वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेनों की सौगात देंगे। इनमें सबसे प्रमुख ट्रेन वाराणसी से खजुराहो वंदे भारत एक्सप्रेस होगी, जिसे प्रधानमंत्री बनारस (पूर्व मंडुवाडीह) रेलवे स्टेशन से हरी झंडी दिखाकर रवाना करेंगे। इस मौके पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहेंगे।
प्रधानमंत्री इस दौरान वर्चुअल माध्यम से अन्य तीन वंदे भारत ट्रेनों—लखनऊ-सहारनपुर, फिरोजपुर-दिल्ली, और एर्नाकुलम-बेंगलुरु वंदे भारत एक्सप्रेस—का भी शुभारंभ करेंगे। इसके साथ ही, वे स्टेशन पर मौजूद नागरिकों और यात्रियों से संवाद भी कर सकते हैं।
बनारस–खजुराहो वंदे भारत एक्सप्रेस का संचालन क्षेत्रीय विकास की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। यह ट्रेन वाराणसी, प्रयागराज, चित्रकूट और खजुराहो जैसे महत्वपूर्ण धार्मिक एवं सांस्कृतिक स्थलों को जोड़ेगी। नई वंदे भारत ट्रेन मौजूदा सेवाओं की तुलना में यात्रा समय को करीब 2 घंटे 40 मिनट तक कम कर देगी, जिससे यात्रियों को तेज़, सुरक्षित और आरामदायक सफर का अनुभव मिलेगा।
इस नई ट्रेन सेवा से न केवल श्रद्धालुओं को यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल खजुराहो तक बेहतर पहुंच मिलेगी, बल्कि धार्मिक पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी नई गति मिलने की उम्मीद है।
काशी का यह स्वागत और विकास का यह अध्याय, प्रधानमंत्री मोदी और बनारस के बीच अटूट रिश्ते का एक और सशक्त प्रतीक बन गया है।