रायपुर: छत्तीसगढ़ सरकार ने संविदा पर कार्यरत कर्मचारियों के लिए बड़ी राहत की घोषणा की है। अब किसी भी संविदा कर्मचारी को बिना सुनवाई और अपील का अवसर दिए नौकरी से हटाया नहीं जा सकेगा। राज्य सरकार ने सभी विभागों को नया आदेश जारी कर स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि किसी भी संविदा कर्मचारी की सेवा समाप्त करने से पहले उसे अपनी बात रखने का पूरा अवसर प्रदान किया जाए।
हाईकोर्ट के आदेश के बाद लिया गया कदम
यह निर्णय बिलासपुर हाईकोर्ट के हालिया आदेश के पालन में लिया गया है। अदालत ने यह स्पष्ट किया था कि संविदा कर्मियों को सेवा से हटाने से पहले उनका पक्ष सुना जाना आवश्यक है। इसके बाद सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) ने सभी विभागाध्यक्षों, कलेक्टरों और जिला पंचायत सीईओ को दिशानिर्देश जारी किए।
अपील का अधिकार अब सुनिश्चित
नई व्यवस्था के अनुसार, यदि किसी संविदा कर्मचारी को सेवा से अलग किया जाता है, तो वह आदेश के खिलाफ 60 दिनों के भीतर विभागाध्यक्ष के समक्ष अपील कर सकेगा। अपील की सुनवाई वरिष्ठ अधिकारी करेंगे और सुनवाई के बाद ही अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
13 साल पुराने नियम में बदलाव
पहले, छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (संविदा नियुक्ति) नियम 2012 के तहत किसी भी संविदा कर्मचारी को केवल एक माह का नोटिस या वेतन देकर हटाया जा सकता था, और अपील या सुनवाई का कोई प्रावधान नहीं था। अब नए प्रावधान से यह सुनिश्चित किया गया है कि किसी भी संविदा कर्मचारी को बिना उचित कारण और सुनवाई के सेवा से अलग नहीं किया जाएगा।
संविदा कर्मचारियों के लिए सुरक्षा कवच
राज्य में बड़ी संख्या में संविदा कर्मचारी कार्यरत हैं, जिनमें से कई वर्षों से स्थायी नियुक्ति की प्रतीक्षा कर रहे हैं। अचानक सेवा समाप्ति की घटनाओं से इन कर्मचारियों में असुरक्षा की भावना थी। अब यह नया आदेश संविदा कर्मियों को नौकरी सुरक्षा और न्याय की गारंटी प्रदान करेगा, जिससे उनकी चिंता और असुरक्षा कम होगी।