धमधा ब्लॉक में किसानों का फूटा गुस्सा: भ्रष्टाचार, बिजली संकट और फर्जी शराब दुकान प्रस्ताव के खिलाफ प्रदर्शन; प्रशासन को सौंपा ज्ञापन

दुर्ग।संवाददाता

धमधा (दुर्ग), 11 नवंबर | धमधा ब्लॉक क्षेत्र के किसानों ने अपनी तीन प्रमुख और लंबित समस्याओं को लेकर किसान बंधु संगठन के बैनर तले आज स्थानीय प्रशासन के खिलाफ जमकर विरोध प्रदर्शन किया। किसानों ने जिला प्रशासन पर उदासीनता का आरोप लगाते हुए एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा और तत्काल कार्रवाई की मांग की।

भ्रष्टाचार का आरोप: भूमि सुधार में लूट-खसोट

संगठन के पदाधिकारियों ने ज्ञापन में सबसे गंभीर मुद्दा राजस्व विभाग में व्याप्त भ्रष्टाचार को बताया। किसानों का आरोप है कि भूमि त्रुटि सुधार (जमीन के रिकॉर्ड में सुधार) से जुड़े प्रकरणों में पटवारी से लेकर तहसील कार्यालय तक खुलेआम रिश्वतखोरी चल रही है। किसानों को जानबूझकर बार-बार पेशी के नाम पर परेशान किया जा रहा है और काम में अनावश्यक विलंब किया जा रहा है। संगठन ने जिला प्रशासन से इस मामले की उच्च स्तरीय जांच कर दोषी कर्मचारियों और अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है ताकि पारदर्शिता लाई जा सके।

ठेलका सब-स्टेशन: 40 गांवों में बिजली का भीषण संकट

दूसरी मुख्य समस्या बिजली आपूर्ति की है। धमधा ब्लॉक के ठेलका सब-स्टेशन में कर्मचारियों की भारी कमी के चलते लगभग 35 से 40 गांवों में लगातार बिजली की कटौती और कम वोल्टेज की समस्या बनी हुई है। इससे किसानों की धान सहित अन्य फसलों की सिंचाई बुरी तरह प्रभावित हो रही है। किसानों ने संबंधित विभाग को तत्काल ठेलका सब-स्टेशन में आवश्यक तकनीकी स्टाफ की पदस्थापना सुनिश्चित करने और विद्युत आपूर्ति नियमित करने के निर्देश देने की मांग की है।

अछोली ग्राम: फर्जी प्रस्ताव पर भड़का आक्रोश

तीसरा मामला अछोली ग्राम पंचायत में शराब दुकान खोलने को लेकर है। किसानों ने आरोप लगाया कि ग्राम पंचायत की बिना अनुमति के शराब दुकान खोलने हेतु एक फर्जी प्रस्ताव तैयार किया गया है। इस कृत्य में जनपद पंचायत धमधा के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) की मिलीभगत की आशंका जताई गई है। संगठन ने बताया कि इस संबंध में पूर्व में भी कलेक्टर जनदर्शन में शिकायत की गई थी, लेकिन आज तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। किसानों ने इस प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

किसान बंधु संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि इन समस्याओं पर प्रशासन ने जल्द ध्यान नहीं दिया और कार्रवाई नहीं की, तो वे एक बड़ा आंदोलन शुरू करने पर मजबूर होंगे।

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