संयुक्त राष्ट्र : भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की उन समितियों के नेतृत्व को लेकर कड़ा एतराज़ जताया है, जो तालिबान पर प्रतिबंधों और आतंकवाद-रोधी मामलों की निगरानी करती हैं। भारत ने कहा कि ऐसे संवेदनशील पैनलों की कमान उन देशों को नहीं दी जानी चाहिए जिनके अपने हित इन मामलों से जुड़े हों।
परिषद की कार्यप्रणाली पर हुई बहस में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी. हरीश ने बिना नाम लिए पाकिस्तान को कटघरे में खड़ा किया। उन्होंने कहा कि सुरक्षा परिषद में किसी भी प्रकार का हित-टकराव स्वीकार्य नहीं होना चाहिए और समितियों की अध्यक्षता सौंपते समय निष्पक्षता सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।
विदित हो कि परिषद की 1988 प्रतिबंध समिति तालिबान नेताओं के यात्रा प्रतिबंध, संपत्ति जब्ती और अन्य प्रतिबंधात्मक कार्रवाइयों को लागू करती है। इसी समिति के कारण अफगान विदेश मंत्री अमीर खान मुत्ताकी की भारत यात्रा कुछ समय के लिए अटकी थी।
भारत ने यह संकेत भी दिया कि पाकिस्तान एक तरफ आतंकवाद-रोधी समिति (CTC) का सह-अध्यक्ष है, जबकि दूसरी ओर कई आतंकवादी संगठनों और संयुक्त राष्ट्र की प्रतिबंध सूची में शामिल नेताओं को पनाह देने के आरोपों से घिरा रहता है। हाल के महीनों में तालिबान शासन के साथ उसकी सीमा पर तनाव भी बढ़ा है।
हरीश ने यह भी कहा कि सहायक निकायों तथा ‘पेन होल्डर्स’ के चयन में पारदर्शिता बेहद जरूरी है। वर्तमान में आतंकियों और आतंकी संगठनों पर प्रतिबंध लगाने या प्रस्तावों को खारिज करने जैसे निर्णय बंद कमरों में लिए जाते हैं, जिससे प्रक्रिया पर सवाल उठते हैं।
भारत ने परिषद से यह मांग दोहराई कि उसकी समितियों के कामकाज, निर्णय प्रक्रिया और अध्यक्षों के चयन को अधिक स्पष्ट और खुला बनाया जाए, ताकि वैश्विक सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर विश्वसनीयता और निष्पक्षता बनी रहे।