अगहन माह का आध्यात्मिक महत्व: क्यों भगवान विष्णु और श्रीकृष्ण की पूजा मानी जाती है सबसे शुभ?

देवघर/धार्मिक डेस्क। हिंदू सनातन परंपरा में वर्ष का प्रत्येक माह और प्रत्येक तिथि किसी न किसी देवता या पावन मान्यता से जुड़ी रहती है। इन दिनों पंचांग के अनुसार अगहन या मार्गशीर्ष महीना चल रहा है, जिसे शास्त्रों में अत्यंत पुण्यदायक माना गया है। धार्मिक मान्यता है कि इस माह में किए गए स्नान, दान, दीपदान और सत्संग से पापों का क्षय होता है और मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होता है।

धार्मिक परंपराओं के अनुसार, इसी पवित्र महीने में भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को श्रीमद्भगवद् गीता का दिव्य उपदेश दिया था। इस कारण अगहन में गीता जयंती भी मनाई जाती है और श्रीकृष्ण एवं भगवान विष्णु की आराधना का विशेष महत्व माना गया है।

देवघर स्थित वैद्यनाथ धाम के वरिष्ठ पुरोहितों ने बताया कि अगहन को भगवान विष्णु की उपासना का महीना कहा जाता है। स्थानीय परंपराओं में तुलसी पूजा, लक्ष्मी-नारायण की आराधना और गीता पाठ को अत्यंत शुभ माना जाता है। ग्रामीण क्षेत्रों में किसान इस समय को शुभ कार्यों और नई फसलों के आरंभ का प्रतीक मानते हैं। इसलिए सूर्य देव को अर्घ्य और गोवर्धन पूजा जैसी परंपराएं भी निभाई जाती हैं। उनका विश्वास है कि इससे घर-परिवार में शांति बनी रहती है और स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां दूर होती हैं।

अगहन में क्या हैं प्रमुख धार्मिक नियम?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अगहन माह में—
• प्रातः गंगाजल से स्नान
• घर-आँगन की स्वच्छता व लिपाई-पुताई
• तुलसी चौरा पर दीप जलाना
• तिल-गुड़, खीर आदि का भोग
• गुरुवार को विष्णु-पूजन और गीता पाठ
• शाम को दीप-धूप और प्रार्थना

अत्यंत शुभ और फलदायी माने जाते हैं।

देवघर सहित आसपास के क्षेत्रों में लोग इस महीने को समृद्धि, अच्छी पैदावार और परिवार की सुख-शांति का महीना मानते हैं। ग्रामीण समुदाय नई फसल की शुरुआत से पहले लक्ष्मी-नारायण पूजा करते हैं और सूर्य देव से वर्षभर बरकत की कामना करते हैं।

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