वेनेजुएला/अंतरराष्ट्रीय डेस्क। वेनेजुएला की प्रमुख विपक्षी नेता और हाल ही में घोषित नोबेल शांति पुरस्कार विजेता मारिया कोरिना मचाडो के लिए नॉर्वे जाकर पुरस्कार ग्रहण करना एक बड़े राजनीतिक और कानूनी खतरे में बदल सकता है। देश के अटॉर्नी जनरल की चेतावनी के अनुसार, यदि मचाडो ओस्लो में होने वाले समारोह में शामिल होने के लिए विदेश जाती हैं, तो उन्हें “फरार” घोषित किया जा सकता है।
पिछले महीने मचाडो को लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा और मानवाधिकारों के लिए संघर्ष करने पर नोबेल शांति पुरस्कार दिए जाने की घोषणा हुई थी। लेकिन वेनेजुएला सरकार ने उनके खिलाफ आतंकवाद, नफरत फैलाने और षड्यंत्र जैसे गंभीर आरोप दर्ज कर रखे हैं। इन मामलों के चलते उनके देश छोड़ने पर रोक की आशंका बनी हुई है।
स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, 58 वर्षीय मचाडो कई महीनों से गुप्त स्थान पर रह रही हैं। पिछले वर्ष अगस्त में राष्ट्रपति निकोलस मादुरो द्वारा तीसरा कार्यकाल घोषित किए जाने के बाद विपक्षी नेताओं पर कार्रवाई तेज हुई थी, जिसके बाद उन्हें भूमिगत होना पड़ा। उनके कई करीबी सहयोगी हिरासत में लिए जा चुके हैं और बाकी या तो छिपे हैं या निर्वासन में चले गए हैं।
मचाडो ने हाल ही में दिए एक इंटरव्यू में कहा था कि यदि सरकार उन्हें ढूंढ लेती है, तो उनकी सुरक्षा को गंभीर खतरा हो सकता है। वह लगभग 15 महीने से एकांत में रह रही हैं और लगातार सरकारी निगरानी तथा राजनीतिक दमन का सामना कर रही हैं।
क्या वर्चुअली ले सकती हैं पुरस्कार?
विश्लेषकों का मानना है कि अपनी सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए मचाडो संभवतः वेनेजुएला से ही वर्चुअली पुरस्कार प्राप्त कर सकती हैं। इससे वह राजनीतिक रूप से सक्रिय भी रह पाएंगी और देश छोड़ने से उत्पन्न कानूनी जोखिम से भी बचेंगी। हालांकि यह फैसला उनके समर्थकों और नोबेल समिति के लिए निराशाजनक हो सकता है।
अमेरिका–वेनेजुएला तनाव ने बढ़ाया विवाद
एक अन्य रिपोर्ट के अनुसार, मचाडो पर एक जांच अमेरिका द्वारा कैरिबियन क्षेत्र में सैन्य मौजूदगी बढ़ाने के समर्थन से भी जुड़ी है। अमेरिकी प्रशासन ने हाल के महीनों में जहाजों और सैन्य विमानों की तैनाती बढ़ाई है, जिसे वॉशिंगटन मादक पदार्थ-विरोधी अभियान बता रहा है। वहीं राष्ट्रपति मादुरो इसे अपनी सरकार को अस्थिर करने की कोशिश करार देते हैं।
वेनेजुएला 2015 से अमेरिकी प्रतिबंधों के दायरे में है। इसी बीच मचाडो ने अमेरिकी सैन्य दबाव का समर्थन किया है, जिससे सरकार ने उनके खिलाफ कार्रवाई और तेज कर दी है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस पूरे प्रकरण को वेनेजुएला में लोकतांत्रिक अधिकारों और राजनीतिक स्वतंत्रता पर हो रहे हमले से जोड़कर देख रहा है।