Mokshada Ekadashi Vrat Katha: मार्गशीर्ष मास के शुक्ल पक्ष में आने वाली मोक्षदा एकादशी इस वर्ष सोमवार को पड़ रही है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह एकादशी पापों का नाश करने वाली और मोक्ष प्रदान करने वाली मानी जाती है। माना जाता है कि इस पवित्र तिथि पर व्रत रखने से मन शुद्ध होता है, जीवन में सकारात्मकता आती है और पितरों को भी दिव्य शांति प्राप्त होती है। शास्त्रों में इस एकादशी को अत्यंत शुभ बताया गया है, क्योंकि इसी दिन श्रीहरि विष्णु ने अर्जुन को गीता का उपदेश दिया था।
इस अवसर पर व्रत, पूजा और दान का विशेष महत्व बताया गया है। ज्योतिषीय मान्यता है कि इस दिन विष्णु उपासना, मंत्रजप और संयमित आचरण से कई जन्मों के पाप भी क्षीण हो जाते हैं।
मोक्षदा एकादशी 2025 : शुभ समय और पंचांग
द्रिक गणना के अनुसार सोमवार को सूर्य वृश्चिक राशि में रहेगा, जबकि चंद्रमा रात 11:18 बजे तक मीन राशि में गोचर करेगा। अभिजीत मुहूर्त का समय 11:49 बजे से 12:31 बजे तक रहेगा। गोधूलि का शुभ समय 5:21 बजे से 5:48 बजे के बीच रहेगा। राहुकाल सुबह 8:15 से 9:33 बजे तक रहेगा। सुबह 8:20 बजे से 7:01 बजे तक भद्रा का योग बनेगा। पंचक काल सुबह 6:56 बजे से 11:18 बजे तक रहेगा।
मोक्षदा एकादशी का महत्व
शास्त्रों के अनुसार इस दिन किया गया व्रत व्यक्ति को आध्यात्मिक उन्नति की ओर ले जाता है। विष्णु उपासना, गीता का पाठ, तुलसी पूजा और दान-पुण्य मोक्ष के मार्ग को प्रशस्त करने वाले बताए गए हैं। ऐसी धारणा है कि इस एकादशी पर किए गए सत्कर्मों का फल कई गुना प्राप्त होता है और पितरों को भी मुक्ति का आशीर्वाद मिलता है।
ये ही कारण हैं कि इस तिथि को पितृ-उद्धार और मोक्ष की विशेष एकादशी माना जाता है।
मोक्षदा एकादशी : व्रत और पूजन विधि
– व्रतधारी को ब्रह्ममुहूर्त में उठकर स्नान करके दिन की शुरुआत करनी चाहिए।
– पूजा स्थल को स्वच्छ कर गंगाजल से पवित्र करें।
– एक चौकी पर स्वच्छ वस्त्र बिछाकर भगवान विष्णु की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
– धूप, दीप, अक्षत, पीले फूल और तुलसी दल चढ़ाकर भगवान की आराधना करें।
– एकादशी व्रत कथा का श्रवण करें और विष्णु सहस्रनाम का जप करें।
– दिनभर संयम रखें और फलाहार या जल पर रहकर व्रत का पालन करें।
– संध्या समय तुलसी पर दीप प्रज्वलित करना शुभ माना जाता है।