ट्रंप प्रशासन की नीति से भारतीय आईटी प्रोफेशनल्स को झटका, H-1B अप्रूवल रिकॉर्ड स्तर पर गिरा

नई दिल्ली। अमेरिका में ट्रंप प्रशासन द्वारा लागू की गई सख्त इमिग्रेशन नीतियों का सीधा असर भारतीय पेशेवरों पर देखने को मिल रहा है। नए नियमों के बाद सिर्फ एक साल के भीतर भारतीयों की H-1B वीजा स्वीकृति में लगभग 40% की भारी गिरावट दर्ज की गई है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, 2015 से अब तक H-1B वीजा अप्रूवल में कुल मिलाकर लगभग 70% की कमी आ चुकी है।

भारत की शीर्ष आईटी कंपनियों की बात करें तो टीसीएस अभी भी सबसे ज्यादा वीजा हासिल करने वाली कंपनी बनी हुई है, लेकिन इसके बावजूद वीजा मिलने की संख्या बीते वर्षों की तुलना में काफी घटी है। वर्तमान वित्त वर्ष में भारतीय कंपनियों को कुल मिलाकर लगभग 4,500 H-1B वीजा ही जारी किए गए, जो पिछले दशक में सबसे कम संख्या है।

टीसीएस सहित भारतीय कंपनियों का बढ़ता रिजेक्शन रेट
टीसीएस का वीजा रिजेक्शन रेट इस वर्ष बढ़कर करीब 7% पहुँच गया, जबकि 2024 में यह लगभग 4% था। इस साल टीसीएस के करीब 5,293 कर्मचारियों को अमेरिका में काम जारी रखने की मंजूरी मिली, लेकिन भारत से अमेरिका भेजे गए कर्मचारियों की संख्या तेजी से घटी है। वर्ष 2024 में जहां 1,452 भारतीय कर्मचारियों को H-1B मिला था, वहीं इस साल यह आंकड़ा घटकर केवल 846 रह गया।

अन्य आईटी दिग्गजों में इन्फोसिस, एचसीएल अमेरिका और एलटीआई माइंडट्री का रिजेक्शन रेट लगभग 1% है, जबकि विप्रो का रिजेक्शन रेट करीब 2% दर्ज किया गया। इसके विपरीत, अमेज़न, मेटा, गूगल और माइक्रोसॉफ्ट जैसी अमेरिकी टेक कंपनियाँ H-1B वीजा प्राप्त करने में शीर्ष पर बनी हुई हैं।

25 शीर्ष कंपनियों में सिर्फ तीन भारतीय कंपनियाँ
H-1B वीजा के लिए सबसे ज्यादा आवेदन करने वाली 25 वैश्चिक कंपनियों की सूची में केवल तीन भारतीय कंपनियाँ शामिल हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि वीजा स्वीकृति में गिरावट की एक वजह यह भी है कि भारतीय आईटी कंपनियाँ अब कम आवेदन कर रही हैं ताकि रिजेक्शन की संभावना कम हो और संसाधनों का सही उपयोग हो सके।

एलन मस्क का बयान भी चर्चा में
अमेरिका की वीजा नीति को लेकर एलन मस्क ने भी बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि भारतीय प्रतिभा ने अमेरिका की प्रौद्योगिकी और नवाचार क्षमता को नई ऊँचाइयाँ दी हैं। मस्क के अनुसार, दुनिया की कई प्रमुख कंपनियों में भारतीय मूल के लोग शीर्ष पदों पर पहुंचकर अमेरिकी उद्योग को मजबूती दे रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय पेशेवरों के योगदान से अमेरिका ने वर्षों तक भारी लाभ कमाया है।

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