नई दिल्ली: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की तीन दिवसीय बैठक बुधवार से शुरू हो रही है। इस बैठक में प्रमुख नीतिगत दरों पर शुक्रवार को अंतिम निर्णय आने की संभावना है। यह बैठक ऐसे समय हो रही है जब मुद्रास्फीति ऐतिहासिक रूप से कम है और आर्थिक वृद्धि की गति अपेक्षाकृत तेज बनी हुई है। चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में देश की रियल GDP वृद्धि दर 8.2 प्रतिशत दर्ज की गई है, जो पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही के 5.6 प्रतिशत से अधिक है।
अक्टूबर में मुद्रास्फीति में गिरावट देखने को मिली, जो अर्थव्यवस्था के मजबूत आधार और मूल्य नियंत्रण उपायों का संकेत देती है। बैंक ऑफ बड़ौदा के चीफ इकोनॉमिस्ट मदन सबनवीस ने कहा कि मौद्रिक नीति भविष्य को ध्यान में रखकर बनाई जाती है। उनका अनुमान है कि चालू वित्त वर्ष की चौथी तिमाही और अगले वित्त वर्ष में मुद्रास्फीति 4 प्रतिशत से अधिक रहने की संभावना है, जिससे रियल रेपो रेट लगभग 1-1.5 प्रतिशत के बीच रहेगा। ऐसे परिदृश्य में उन्हें लगता है कि नीतिगत दर में कोई बड़ा बदलाव नहीं होना चाहिए।
वहीं, एसबीआई की हालिया रिपोर्ट में कहा गया है कि दिसंबर में नीतिगत दरों में बदलाव की संभावना कम है। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि RBI को यील्ड और लिक्विडिटी के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए सावधानीपूर्वक कदम उठाने पड़ सकते हैं।
एचएसबीसी ग्लोबल इन्वेस्टमेंट रिसर्च का अनुमान है कि MPC बैठक के दौरान RBI रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट की कटौती कर सकता है, जिससे यह वर्तमान 5.50 प्रतिशत से घटकर 5.25 प्रतिशत हो सकता है। इस कदम का उद्देश्य आर्थिक वृद्धि को बनाए रखते हुए मुद्रास्फीति पर नियंत्रण बनाए रखना है।