नई दिल्ली। दक्षिण-पूर्व एशिया में शांति बहाल करने की कोशिशों को बड़ा झटका लगा है। थाईलैंड और कंबोडिया के बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मध्यस्थता से 26 अक्टूबर 2025 को दक्षिण कोरिया में हुआ सीजफायर समझौता एक बार फिर ढह गया है। सोमवार की सुबह थाईलैंड ने कंबोडिया के सैन्य ढांचों को निशाना बनाते हुए जोरदार हवाई हमले शुरू कर दिए, जिसके बाद दोनों देशों के बीच तनाव तेजी से बढ़ गया है।
सूत्रों के अनुसार, थाई वायुसेना की कार्रवाई के तुरंत बाद दोनों पड़ोसी देश एक-दूसरे पर संघर्ष शुरू करने का आरोप लगाने लगे। थाई सेना के प्रवक्ता मेजर जनरल विन्थाई सुवारी का कहना है कि कंबोडियाई आर्टिलरी यूनिट्स ने पहले थाई सीमा पर हमला किया था, जिसमें एक सैनिक की मौत हो गई और कई घायल हुए। उनके मुताबिक, थाई वायुसेना ने चोंग एन मा पास के पास स्थित उन स्थानों को निशाना बनाया, जहां से कंबोडियाई सेना मोर्टार और भारी हथियारों का उपयोग कर रही थी।
थाई सेना द्वारा जारी बयान में दावा किया गया है कि सोमवार तड़के लगभग 3 बजे कंबोडियाई टुकड़ियों ने थाई सीमा क्षेत्रों को टारगेट किया। थाईलैंड ने आरोप लगाया कि कंबोडिया ने सीमा के पास बड़ी संख्या में हथियार जमा किए थे और लड़ाकू दस्तों को आगे बढ़ाया था, जो संभावित सैन्य कार्रवाई के संकेत माने जा रहे हैं।
उधर, कंबोडिया ने थाई आरोपों को सिरे से खारिज किया है। कंबोडियाई रक्षा मंत्रालय ने कहा कि उसने किसी भी प्रकार की जवाबी कार्रवाई नहीं की और वह अंतरराष्ट्रीय कानूनों के दायरे में रहते हुए स्थिति पर नजर बनाए हुए है। कंबोडियाई सेना ने उल्टा थाईलैंड पर सुबह करीब 5:04 बजे उनकी चौकियों पर गोलीबारी करने का आरोप लगाया। उनका कहना है कि थाई सेना कई दिनों से उकसाने वाली हरकतें कर रही थी, जिससे यह टकराव उत्पन्न हुआ।
तनाव बढ़ने के बीच थाईलैंड ने सीमा से लगे इलाकों में बसे लगभग 70 प्रतिशत नागरिकों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा दिया है। दोनों देशों की ओर से बढ़ रहे आरोप-प्रत्यारोप के चलते मामले ने गंभीर रूप ले लिया है और क्षेत्रीय स्थिरता पर सवाल खड़े हो गए हैं।