नई दिल्ली। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और तिरुवनंतपुरम के सांसद शशि थरूर एक बार फिर सुर्खियों में हैं। वजह है—पार्टी की लगातार तीसरी अहम बैठक से उनकी अनुपस्थिति। पार्टी नेतृत्व द्वारा 99 लोकसभा सांसदों की रणनीति बैठक शुक्रवार को बुलाई गई थी, जिसका उद्देश्य शीतकालीन सत्र के समापन से पहले सरकार पर हमले की रूपरेखा तय करना था। लेकिन थरूर इस महत्त्वपूर्ण बैठक में नहीं पहुंचे, जिससे राजनीतिक हलकों में नई चर्चाएँ तेज हो गई हैं।
कोलकाता में निजी कार्यक्रम में व्यस्त
थरूर ने इस अनुपस्थिति की वजह निजी बताई है। उन्होंने सोशल मीडिया पर जानकारी दी कि वे कोलकाता में अपने लंबे समय से सहयोगी जॉन कोशी की शादी और बहन स्मिता थरूर के जन्मदिन के सिलसिले में कार्यक्रमों में शामिल होने पहुँचे हैं। इस कारण दिल्ली की बैठक में शामिल नहीं हो सके।
दिलचस्प बात यह भी है कि बैठक से कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी भी दूर रहे—जो अक्सर अपने रुख को लेकर चर्चा में रहते हैं।
पहले भी दो बैठकों से रहे दूर
थरूर की यह अनुपस्थिति पहली नहीं है। नवंबर में भी वे दो महत्वपूर्ण बैठकों से गायब रहे थे।
- 30 नवंबर को सोनिया गांधी द्वारा बुलाई गई मीटिंग में वे इसलिए नहीं पहुँच पाए क्योंकि उनकी फ्लाइट री-शेड्यूल हो गई थी और वे अपनी 90 वर्षीय मां के साथ केरल से दिल्ली लौट रहे थे।
- 18 नवंबर को SIR मुद्दे पर सोनिया गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे की बैठक में उन्होंने स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए हिस्सा नहीं लिया।
पहले भी मोदी की तारीफ को लेकर रही चर्चा
थरूर द्वारा कई मौकों पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रशंसा किए जाने से पार्टी के भीतर पहले ही असहजता दिख चुकी है। अब लगातार बैठकों से दूरी ने अटकलों को और बढ़ा दिया है।
क्या संकेत दे रहे हैं थरूर?
अगस्त 2020 में नेतृत्व को चुनौती देने वाले जी-23 समूह का हिस्सा रहे थरूर की मौजूदा दूरी को लेकर सवाल उठ रहे हैं। पार्टी भीतर भी यह चर्चा बढ़ गई है कि क्या वे किसी नए राजनीतिक रास्ते की तैयारी कर रहे हैं या यह महज़ परिस्थितिजन्य अनुपस्थिति है।
कुल मिलाकर, कांग्रेस की रणनीतिक बैठकों से लगातार गैरमौजूदगी ने थरूर के राजनीतिक रुख को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है।