नई दिल्ली : हर साल की तरह इस बार भी मकर संक्रांति की तारीख को लेकर लोगों के मन में भ्रम बना हुआ है। कई लोग यह जानना चाहते हैं कि मकर संक्रांति 2026 में 14 जनवरी को मनाई जाएगी या 15 जनवरी को। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार, वर्ष 2026 में मकर संक्रांति का पर्व 14 जनवरी को ही मनाया जाएगा। इस दिन सूर्य देव मकर राशि में प्रवेश करेंगे, जिसके साथ ही शुभ कार्यों की शुरुआत का समय भी प्रारंभ हो जाएगा।
मकर संक्रांति को केवल एक पर्व नहीं, बल्कि नई शुरुआत और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है। इस दिन के बाद से विवाह, गृह प्रवेश और अन्य मांगलिक कार्यों की अनुमति मिल जाती है।
- देशभर में अलग-अलग नामों से मनाया जाता है यह पर्व
- मकर संक्रांति भारत का ऐसा पर्व है, जो हर क्षेत्र में अपनी अलग पहचान के साथ मनाया जाता है।
- उत्तर भारत में इसे मकर संक्रांति
- तमिलनाडु में पोंगल
- गुजरात और राजस्थान में उत्तरायण
- पंजाब और हरियाणा में माघी
- महाराष्ट्र, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और पश्चिम बंगाल में पौष संक्रांति
के नाम से जाना जाता है। हालांकि नाम अलग-अलग हैं, लेकिन पर्व का भाव और उद्देश्य एक ही है—सूर्य देव की आराधना और प्रकृति के प्रति आभार।
मकर संक्रांति 2026 का शुभ समय
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, 14 जनवरी 2026 को सूर्य देव धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करेंगे। इसी कारण इस दिन को अत्यंत शुभ माना गया है।
इस दिन का शुभ मुहूर्त सुबह 9:03 बजे से शाम 5:46 बजे तक रहेगा, जो पूजा-पाठ, स्नान, दान और सूर्य अर्घ्य के लिए उत्तम माना जा रहा है।
दान-पुण्य और परंपराओं का खास महत्व
मकर संक्रांति के दिन तिल और गुड़ का दान विशेष फलदायी माना जाता है। तिल को शुद्धता और नकारात्मक ऊर्जा से मुक्ति का प्रतीक माना गया है, जबकि गुड़ जीवन में मिठास और समृद्धि लाने का संकेत देता है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन तिल-गुड़ का दान करने से सूर्य देव और शनि देव दोनों प्रसन्न होते हैं।
इसके अलावा, कई राज्यों में इस दिन पतंगबाजी, खिचड़ी का प्रसाद, और सामूहिक स्नान की परंपरा भी निभाई जाती है, जो इस पर्व को और भी खास बनाती है।