नई दिल्ली।संसद के शीतकालीन सत्र के समापन के बाद कांग्रेस ने सत्तापक्ष पर तीखा हमला बोला है। पार्टी का आरोप है कि यह सत्र लोकतांत्रिक मर्यादाओं और ऐतिहासिक व्यक्तित्वों के सम्मान के लिहाज से निराशाजनक रहा। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि सत्र की शुरुआत जहां गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर से जुड़े प्रसंगों को लेकर विवाद से हुई, वहीं इसका अंत महात्मा गांधी के अपमान से जुड़ी बहसों के साथ हुआ। इस दौरान देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू को लेकर भी टिप्पणियां की गईं, जो दुर्भाग्यपूर्ण हैं।
रमेश ने सत्र को “शीतकालीन सत्र” के बजाय “प्रदूषणकालीन सत्र” करार देते हुए कहा कि सरकार वायु प्रदूषण जैसे गंभीर जनस्वास्थ्य मुद्दे पर चर्चा से बचती नजर आई। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि ऐसा लगता है मानो सरकार यह मानती ही नहीं कि प्रदूषण का फेफड़ों और लोगों की सेहत पर कोई असर पड़ता है।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सत्र से पहले सर्वदलीय बैठक में जिन विधेयकों को लाने की जानकारी दी गई थी, उनमें से कई को पेश ही नहीं किया गया। कुल मिलाकर 12 अहम विधेयकों की बात कही गई थी, लेकिन पांच विधेयक सदन में नहीं आए। वहीं कुछ महत्वपूर्ण विधेयकों को सत्र के आखिरी दिनों में जल्दबाजी में लाया गया और पारित कराया गया।
कांग्रेस नेता ने वंदे मातरम् पर हुई चर्चा का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐतिहासिक तथ्यों को तोड़-मरोड़कर प्रस्तुत किया गया और गुरुदेव टैगोर के योगदान को नजरअंदाज किया गया। उन्होंने याद दिलाया कि टैगोर के सुझाव पर ही वंदे मातरम् के दो अंतरों को राष्ट्रीय गीत के रूप में मान्यता दी गई थी।
जयराम रमेश ने कहा कि विपक्ष ने बार-बार वायु प्रदूषण पर व्यापक चर्चा की मांग उठाई, लेकिन सरकार ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। उनका कहना था कि देश की जनता जिन समस्याओं से जूझ रही है, उन पर संवाद के बजाय सरकार ने बहस से बचने का रास्ता चुना।