छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने महिला सम्मान और सामाजिक मर्यादा को लेकर एक महत्वपूर्ण निर्णय सुनाया है। कोर्ट ने साफ शब्दों में कहा कि किसी महिला का हाथ पकड़कर जबरन खींचना और इस दौरान “I Love You” कहना उसकी गरिमा और मर्यादा का स्पष्ट उल्लंघन है। अदालत ने विशेष रूप से यह भी टिप्पणी की कि ग्रामीण परिवेश में इस तरह का व्यवहार और अधिक आपत्तिजनक माना जाएगा।
क्या कहा कोर्ट ने?
यह टिप्पणी जस्टिस नरेश कुमार चंद्रवंशी की एकल पीठ ने की। वे उस याचिका पर सुनवाई कर रहे थे, जिसमें आरोपी ने निचली अदालत द्वारा दी गई सजा को चुनौती दी थी। आरोपी घटना के समय 19 वर्ष का था और उस पर आरोप था कि उसने स्कूल से लौट रही एक छात्रा का हाथ पकड़कर उसे खींचा और “आई लव यू” कहा।
निचली अदालत का फैसला
यह मामला रायगढ़ जिले के भूदेवपुर थाना क्षेत्र का है, जहां 28 नवंबर 2019 को छात्रा के साथ छेड़छाड़ की घटना सामने आई थी। इस मामले में रायगढ़ की फास्ट ट्रैक कोर्ट ने आरोपी को आईपीसी और पॉक्सो एक्ट की अलग-अलग धाराओं के तहत दोषी ठहराते हुए दो मामलों में तीन-तीन साल की सजा सुनाई थी।
हाई कोर्ट ने क्यों घटाई सजा?
हाई कोर्ट में सुनवाई के दौरान यह तथ्य सामने आया कि पीड़िता की उम्र को लेकर पर्याप्त और ठोस प्रमाण प्रस्तुत नहीं किए जा सके। इसी आधार पर अदालत ने पॉक्सो एक्ट के तहत दी गई सजा में राहत देते हुए आरोपी की कुल सजा को घटाकर एक वर्ष कर दिया।
महत्वपूर्ण संदेश
हालांकि कोर्ट ने सजा में संशोधन किया, लेकिन अपने फैसले में यह स्पष्ट किया कि किसी महिला के साथ इस तरह का व्यवहार स्वीकार्य नहीं है। अदालत ने कहा कि प्रेम का इज़हार भी तब अपराध की श्रेणी में आ सकता है, जब वह जबरदस्ती, अभद्रता और महिला की इच्छा के विरुद्ध किया जाए।