अंतरराष्ट्रीय डेस्क | पाकिस्तान के अशांत प्रांत बलूचिस्तान में सरकारी कर्मचारियों और प्रशासन के बीच टकराव और गहरा हो गया है। कर्मचारियों ने अपनी लंबित मांगों और सरकार की कथित उदासीनता के खिलाफ पेन-डाउन स्ट्राइक शुरू कर दी है। इस आंदोलन के चलते प्रांत के सरकारी कामकाज पर व्यापक असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
सरकार पर अनदेखी और नाकामी के आरोप
सरकारी कर्मचारियों के बड़े मंच बलूचिस्तान ग्रैंड अलायंस ने आरोप लगाया है कि लंबे समय से उनकी मांगों को नजरअंदाज किया जा रहा है। संगठन के नेताओं का कहना है कि बार-बार ज्ञापन और चेतावनियों के बावजूद सरकार ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया, जिससे कर्मचारियों को आंदोलन तेज करने के लिए मजबूर होना पड़ा।
दो दिन बंद रहेंगे सरकारी दफ्तर
पेन-डाउन स्ट्राइक के ऐलान के साथ ही कर्मचारियों ने 30 और 31 दिसंबर को प्रांत के सभी सरकारी कार्यालयों में कामकाज पूरी तरह ठप रखने का फैसला किया है। हालांकि, आम जनता को राहत देते हुए यह स्पष्ट किया गया है कि स्वास्थ्य विभाग की आपात सेवाएं जारी रहेंगी, ताकि मरीजों को किसी तरह की परेशानी न हो।
लेवी फोर्स के विलय ने बढ़ाया विवाद
इस आंदोलन की पृष्ठभूमि में लेवी फोर्स और पुलिस के विलय को लेकर जारी सरकारी अधिसूचना भी एक बड़ा कारण मानी जा रही है। कर्मचारियों और लेवी फोर्स के सदस्यों का कहना है कि सरकार ने बिना व्यापक सहमति के यह फैसला लिया है, जिससे असंतोष बढ़ा है।
142 साल पुरानी फोर्स के अस्तित्व पर सवाल
लेवी फोर्स से जुड़े कर्मचारियों ने हाल के दिनों में कई जिलों में रैलियां और प्रदर्शन किए। उनका कहना है कि लेवी फोर्स का 142 साल का इतिहास रहा है और इसने बलूचिस्तान में कानून-व्यवस्था बनाए रखने में अहम भूमिका निभाई है। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि विलय का फैसला इस ऐतिहासिक भूमिका और बलिदानों को नजरअंदाज करता है।
हाईकोर्ट के आदेश का हवाला, नोटिफिकेशन वापस लेने की मांग
आंदोलनकारियों ने सरकार से मांग की है कि लेवीज-पुलिस विलय पर हाईकोर्ट के स्टे ऑर्डर को प्रभावी ढंग से लागू किया जाए और जारी अधिसूचना को तत्काल वापस लिया जाए। उनका कहना है कि पहले भी ऐसे प्रयास असफल रहे हैं और यदि सरकार ने फैसला वापस नहीं लिया तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।
प्रशासन पर बढ़ता दबाव
विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार हो रहे विरोध प्रदर्शनों और अब पेन-डाउन स्ट्राइक से बलूचिस्तान की प्रशासनिक व्यवस्था पर भारी दबाव पड़ सकता है। आने वाले दिनों में सरकार और कर्मचारियों के बीच बातचीत होती है या नहीं, इस पर पूरे प्रांत की नजर टिकी हुई है।