अंबिकापुर।छत्तीसगढ़ के सरगुजा संभाग के अंबिकापुर क्षेत्र से जुड़ी एक धार्मिक परंपरा के दौरान सामने आई घटना ने ग्रामीणों में स्वास्थ्य को लेकर चिंता बढ़ा दी है। सरगंवा गांव में आयोजित पारंपरिक पूजा में बलि दिए गए एक बकरे को लेकर बाद में यह आशंका जताई गई कि वह पहले किसी संदिग्ध रूप से बीमार कुत्ते के संपर्क में आ चुका था।
ग्रामीणों के अनुसार, गांव में हर तीन साल में सामूहिक पूजा का आयोजन किया जाता है, जिसमें देवी-देवताओं की आराधना के बाद बलि प्रथा का पालन किया जाता है। इस बार 28 दिसंबर को हुए आयोजन में करीब 15 बकरों की बलि दी गई और परंपरा के अनुसार पका हुआ मांस प्रसाद के रूप में वितरित किया गया, जिसे बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने ग्रहण किया।
कार्यक्रम के कुछ दिन बाद यह जानकारी सामने आई कि बलि दिए गए बकरों में से एक को पहले किसी कुत्ते ने काटा था, जिससे गांव में संक्रमण फैलने की आशंका को लेकर चर्चा शुरू हो गई। सूचना मिलते ही स्वास्थ्य विभाग और पशुपालन विभाग सतर्क हो गए हैं।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. पी.एस. मार्को ने बताया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए राष्ट्रीय रेबीज नियंत्रण कार्यक्रम से जुड़े अधिकारी गांव का दौरा करेंगे और स्थिति का आकलन करेंगे। वहीं वरिष्ठ पशु चिकित्सक डॉ. सी.के. मिश्रा ने स्पष्ट किया कि रेबीज का संक्रमण आमतौर पर संक्रमित जानवर के काटने या उसकी लार के सीधे संपर्क से फैलता है, जबकि अच्छी तरह पकाए गए मांस से संक्रमण का खतरा काफी कम माना जाता है।
फिलहाल प्रशासन द्वारा ग्रामीणों को जागरूक किया जा रहा है और एहतियातन निगरानी बढ़ा दी गई है, ताकि किसी भी संभावित स्वास्थ्य जोखिम से समय रहते निपटा जा सके।