Numbers On Trains: भारतीय रेलवे न केवल किफायती है, बल्कि आरामदायक भी है। इसी वजह से हर वर्ग के लोग इसमें सफर करते हैं। लेकिन क्या आपने कभी ट्रेन के डिब्बे पर लिखे 5 अंकों के नंबर पर ध्यान दिया है? आम लोगों के लिए यह सिर्फ संख्या लगती है, लेकिन रेलवे कर्मचारियों के लिए यह कोड बेहद महत्वपूर्ण होता है। यह 5-अंकों वाला कोड ट्रेन के डिब्बे की पूरी जानकारी देता है — जैसे डिब्बे का निर्माण साल, श्रेणी और रेलवे जोन।
पहचान और रखरखाव के लिए बनाया गया कोड सिस्टम
रेलवे ने कोचों की पहचान और रखरखाव को आसान बनाने के लिए यह 5-अंकों का सिस्टम अपनाया है। इस कोड की मदद से कर्मचारियों को किसी भी डिब्बे की जानकारी तुरंत मिल जाती है। यह कोड हर डिब्बे के बाहर साफ-साफ लिखा होता है।
डिब्बे पर नंबर क्यों लिखा जाता है
5 अंकों के इस नंबर का पहला दो अंक बताते हैं कि डिब्बा किस साल तैयार हुआ था, जबकि आखिरी तीन अंक डिब्बे की श्रेणी दर्शाते हैं। इससे यह पता चलता है कि डिब्बा फर्स्ट क्लास, सेकेंड क्लास या स्लीपर क्लास का है।
उदाहरण:
- अगर बोगी पर लिखा 8439, तो इसका मतलब है कि यह डिब्बा साल 1984 में बना।
- यदि संख्या 04052 है, तो डिब्बा 2004 में निर्मित हुआ होगा।
डिब्बे पर अक्सर रेलवे ज़ोन के कोड भी लिखे होते हैं। जैसे:
- WCR – पश्चिमी मध्य रेलवे
- ER – पूर्वी रेलवे
- NF – उत्तरी सीमांत रेलवे
- SR – दक्षिण रेलवे
डिब्बे की क्लास कैसे पहचानें
डिब्बे के आखिरी तीन अंकों से इसकी क्लास पता लगाई जा सकती है:
- 001–025: एसी फर्स्ट क्लास
- 051–100: एसी 2 टियर
- 101–150: एसी 3 टियर
- 201–400: स्लीपर क्लास
- 401–600: जनरल सेकेंड क्लास
- 601–700: सेकेंड क्लास सीटिंग
इस तरह, हर डिब्बे पर लिखा 5-अंकों का कोड केवल संख्या नहीं, बल्कि रेलवे के लिए एक महत्वपूर्ण पहचान पत्र है। इसे देखकर कर्मचारी डिब्बे की उम्र, श्रेणी और जोन का तुरंत अंदाजा लगा सकते हैं।