सूर्य उपासना से शिव आराधना तक: पोंगल में खास बन जाता है बिना नींव का यह मंदिर

Pongal 2026  : 14 जनवरी को उत्तर भारत में मकर संक्रांति का पर्व मनाया जाता है, वहीं इसी दिन से दक्षिण भारत में पोंगल उत्सव की शुरुआत होती है। सूर्य के उत्तरायण होने के साथ जुड़ा यह पर्व विशेष रूप से तमिलनाडु में बड़े श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाता है। पोंगल का यह चार दिवसीय उत्सव 14 जनवरी से 17 जनवरी तक चलता है, लेकिन तंजावुर में इसका स्वरूप कुछ अलग और बेहद खास होता है।

पोंगल सूर्य उपासना और फसल उत्सव का प्रतीक है। इस दौरान सूर्य देव को नई फसल से बने चावल और गुड़ का भोग अर्पित किया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सूर्य को समस्त ऊर्जा का स्रोत माना गया है और उत्तरायण काल को साधना, दान और यज्ञ के लिए अत्यंत शुभ बताया गया है।

तमिलनाडु का तंजावुर जिला, जिसे “चावल का कटोरा” कहा जाता है, पोंगल के दौरान आस्था का प्रमुख केंद्र बन जाता है। यहां स्थित भगवान शिव को समर्पित बृहदेश्वर मंदिर में इस अवसर पर चार दिनों तक विशेष पूजा-अर्चना और अनुष्ठानों का आयोजन किया जाता है। मंदिर परिसर को फूलों और दीपों से सजाया जाता है और सुबह से लेकर देर रात तक धार्मिक गतिविधियां चलती रहती हैं।

पोंगल उत्सव के दौरान भक्त सूर्य की आराधना के साथ-साथ भगवान शिव को नई फसल से बने भोग अर्पित करते हैं। कई किसान अपनी उपज का पहला अंश मंदिर में चढ़ाकर धरती माता और पशुधन के प्रति कृतज्ञता प्रकट करते हैं। मट्टू पोंगल के दिन गो-पूजन किया जाता है, जो कृषि और वैदिक परंपरा में पशुओं के महत्व को दर्शाता है।

चार दिन चलने वाले इस पर्व में हर दिन अलग-अलग धार्मिक अनुष्ठान होते हैं। श्रद्धालु पापों से मुक्ति, रोग निवारण और मनोकामना पूर्ति की कामना के साथ विशेष पूजा कराते हैं। पोंगल के दौरान मंदिर में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है।

बृहदेश्वर मंदिर न केवल धार्मिक बल्कि वास्तुकला की दृष्टि से भी अद्वितीय है। यह मंदिर चोल सम्राट राजाराजा चोल प्रथम द्वारा निर्मित कराया गया था और इसे द्रविड़ स्थापत्य शैली का उत्कृष्ट उदाहरण माना जाता है। मंदिर का निर्माण ग्रेनाइट पत्थरों से किया गया है, जबकि तंजावुर के आसपास कई किलोमीटर तक ग्रेनाइट उपलब्ध नहीं है, जिससे इसके निर्माण को लेकर आज भी रहस्य बना हुआ है।

सबसे रोचक तथ्य यह है कि यह विशाल शिव मंदिर बिना पारंपरिक नींव के 16 फीट ऊंचे चबूतरे पर खड़ा है। मंदिर का 13 मंजिला गोपुरम करीब 80 टन वजनी एक ही ग्रेनाइट शिला से निर्मित बताया जाता है। कहा जाता है कि इस भव्य मंदिर के निर्माण में लगभग सात वर्ष लगे थे।

पोंगल के अवसर पर बृहदेश्वर मंदिर न केवल श्रद्धा का केंद्र बनता है, बल्कि यह भारतीय संस्कृति, कृषि परंपरा और वास्तुकला की महान विरासत का भी जीवंत उदाहरण प्रस्तुत करता है।

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