गांधीनगर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज की मौजूदगी में भारत-जर्मनी द्विपक्षीय सहयोग को नई दिशा देने वाले कई अहम समझौतों की जानकारी दी। गांधीनगर स्थित महात्मा मंदिर कन्वेंशन एंड एग्जिबिशन सेंटर में हुई द्विपक्षीय वार्ता के बाद संयुक्त प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि ग्रीन हाइड्रोजन में दोनों देशों की कंपनियों का नया मेगा प्रोजेक्ट भविष्य की ऊर्जा जरूरतों के लिए गेम-चेंजर साबित होगा।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि स्वामी विवेकानंद की जयंती के अवसर पर जर्मन चांसलर की भारत यात्रा एक सुखद संयोग है। उन्होंने बताया कि स्वामी विवेकानंद ने भारत और जर्मनी के बीच ज्ञान, दर्शन और आत्मिक संबंधों की मजबूत नींव रखी थी, जिसे आज की यह यात्रा नई ऊर्जा और विस्तार दे रही है। चांसलर मर्ज की यह यात्रा उनके कार्यकाल की पहली भारत और एशिया यात्रा है, जो भारत के प्रति जर्मनी की प्राथमिकता को दर्शाती है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत और जर्मनी के बीच बढ़ता आर्थिक सहयोग न केवल दोनों देशों बल्कि पूरी मानवता के लिए महत्वपूर्ण है। उन्होंने बताया कि द्विपक्षीय व्यापार 50 अरब डॉलर के पार पहुंच चुका है और भारत में दो हजार से अधिक जर्मन कंपनियों की मौजूदगी दोनों देशों के बीच गहरे भरोसे को दर्शाती है। इंडिया-जर्मनी सीईओ फोरम में इस मजबूत साझेदारी की स्पष्ट झलक देखने को मिली।
पीएम मोदी ने कहा कि तकनीक और नवाचार के क्षेत्र में भारत-जर्मनी सहयोग लगातार मजबूत हो रहा है। रिन्यूएबल एनर्जी में साझा प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाते हुए दोनों देशों ने इंडिया-जर्मनी सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित करने का निर्णय लिया है, जो नॉलेज, टेक्नोलॉजी और इनोवेशन का साझा मंच बनेगा। इसके तहत जलवायु परिवर्तन, ऊर्जा, शहरी विकास और अर्बन मोबिलिटी जैसे क्षेत्रों में नई परियोजनाएं शुरू की जाएंगी।
प्रधानमंत्री ने ग्रीन हाइड्रोजन से जुड़े मेगा प्रोजेक्ट को भविष्य की स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में ऐतिहासिक कदम बताते हुए कहा कि इससे भारत-जर्मनी की सुरक्षित, भरोसेमंद और मजबूत सप्लाई चेन को भी मजबूती मिलेगी। इस दिशा में किए गए एमओयू दोनों देशों के सहयोग को नई गति प्रदान करेंगे।
रक्षा क्षेत्र पर बात करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि रक्षा और सुरक्षा में बढ़ता सहयोग आपसी विश्वास का प्रतीक है। उन्होंने रक्षा उद्योगों के बीच को-डेवलपमेंट और को-प्रोडक्शन के नए अवसरों के लिए रोडमैप तैयार करने की बात कही, जिससे रणनीतिक साझेदारी और मजबूत होगी।
प्रधानमंत्री मोदी ने भारत-जर्मनी के ऐतिहासिक जन-संपर्क संबंधों का उल्लेख करते हुए रवीन्द्रनाथ टैगोर, स्वामी विवेकानंद और मैडम कामा के योगदान को याद किया। उन्होंने कहा कि इन महान व्यक्तित्वों ने दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक और वैचारिक सेतु बनाया, जिसे आज आधुनिक साझेदारी में बदला जा रहा है।
पीएम मोदी ने स्किल डेवलपमेंट, मोबिलिटी और माइग्रेशन पर जोर देते हुए कहा कि भारत की युवा प्रतिभा जर्मनी की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। ग्लोबल स्किल्स पार्टनरशिप से खासकर हेल्थकेयर पेशेवरों को लाभ मिलेगा। साथ ही शिक्षा, वीजा सुविधा, समुद्री विरासत और आयुर्वेद के क्षेत्र में हुए समझौतों को उन्होंने भारत-जर्मनी संबंधों के नए अध्याय की शुरुआत बताया।
प्रधानमंत्री ने कहा कि ये सभी पहल भारत-जर्मनी साझेदारी को केवल द्विपक्षीय सहयोग तक सीमित नहीं रखेंगी, बल्कि वैश्विक चुनौतियों के समाधान में भी अहम भूमिका निभाएंगी।