नई दिल्ली। कांग्रेस की वरिष्ठ नेता और पार्टी चेयरपर्सन सोनिया गांधी ने केंद्र सरकार पर मनरेगा को कमजोर करने का आरोप लगाते हुए मोदी सरकार की नीतियों पर कड़ा प्रहार किया है। ‘मनरेगा बचाओ संग्राम’ अभियान के तहत जारी एक वीडियो संदेश में उन्होंने कहा कि ग्रामीण गरीबों के लिए जीवनरेखा साबित हुई इस योजना को जानबूझकर नुकसान पहुंचाया जा रहा है।
सोनिया गांधी ने कहा कि मनरेगा सिर्फ एक योजना नहीं, बल्कि गरीब और वंचित तबके को सम्मान के साथ रोजगार देने का संवैधानिक अधिकार है। उन्होंने याद दिलाया कि पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के नेतृत्व में यह कानून संसद में सर्वसम्मति से पारित हुआ था, जिसने ग्रामीण भारत में बड़े पैमाने पर पलायन को रोका और करोड़ों परिवारों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान की।
उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले एक दशक से केंद्र सरकार ने मनरेगा की आत्मा को ही खत्म करने की कोशिश की है। बजट में कटौती, भुगतान में देरी और नियमों में एकतरफा बदलाव कर योजना को कमजोर किया गया है। सोनिया गांधी ने कहा कि अब यह तय करने का अधिकार भी राज्यों और पंचायतों से छीन लिया गया है कि किसे काम मिलेगा और कहां मिलेगा, जिससे जमीनी जरूरतों की अनदेखी हो रही है।
कांग्रेस नेता ने स्पष्ट किया कि मनरेगा किसी एक राजनीतिक दल की नहीं, बल्कि देश की जनता की योजना है। उन्होंने कहा कि इस कानून को कमजोर करना किसानों, भूमिहीन मजदूरों और ग्रामीण गरीबों पर सीधा हमला है। सोनिया गांधी ने यह भी कहा कि जिस संघर्ष से गरीबों को रोजगार का अधिकार मिला था, उसी दृढ़ता से अब उसे बचाने की लड़ाई भी लड़ी जाएगी।
उन्होंने जनता से अपील की कि मनरेगा पर हो रहे हमलों के खिलाफ एकजुट होकर आवाज उठाई जाए। सोनिया गांधी ने कहा कि कांग्रेस इस मुद्दे पर पीछे हटने वाली नहीं है और देशभर में जनजागरूकता फैलाने का काम करेगी।
गौरतलब है कि कांग्रेस का 45 दिवसीय राष्ट्रव्यापी अभियान ‘मनरेगा बचाओ संग्राम’ 10 जनवरी से शुरू हुआ है, जो 25 फरवरी तक चलेगा। इस दौरान पार्टी गांव-गांव जाकर जागरूकता कार्यक्रम, शांतिपूर्ण प्रदर्शन, विधानसभा घेराव और ‘काम मांगो’ अभियान के जरिए जनता से सीधा संवाद करेगी।