आई-पैक केस में ईडी ने दर्ज किया नया आरोप, ममता बनर्जी पर दस्तावेज चोरी का शक

नई दिल्ली: आई-पैक से जुड़ी छापेमारी मामले में सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के बीच तीखी बहस हुई। ईडी ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर गंभीर आरोप लगाए, जिसमें दस्तावेज चोरी और जांच में बाधा डालने का दावा शामिल है। वहीं, टीएमसी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने इन आरोपों को खारिज करते हुए जवाब दिया।

ईडी का आरोप: दस्तावेजों और डिजिटल डिवाइस की चोरी

ईडी की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बताया कि छापेमारी के दौरान मुख्यमंत्री कथित तौर पर गैरकानूनी रूप से स्थल पर पहुंचीं और तीन अहम दस्तावेजों के साथ सभी डिजिटल डिवाइस अपने कब्जे में ले लिया। ईडी ने कहा कि यह कार्रवाई गंभीर अपराध के दायरे में आती है और इससे जांच प्रभावित हो सकती है।

जांच में बाधा और एफआईआर की मांग

अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने सुप्रीम कोर्ट से यह अनुरोध किया कि मुख्यमंत्री के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाए। उन्होंने कहा कि प्रथम दृष्टया यह मामला चोरी और लूट के तहत आता है। इसके अलावा पश्चिम बंगाल पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए, क्योंकि एजेंसी का कहना है कि पुलिस ने छापेमारी के दौरान सहयोगी की तरह व्यवहार किया।

टीएमसी की दलील और चुनावी समय पर सवाल

टीएमसी के वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने आरोपों को चुनौती देते हुए कहा कि आई-पैक परिसर में पार्टी का संवेदनशील चुनावी डेटा सुरक्षित रखा जाता है। उन्होंने ईडी की समयबद्धता पर सवाल उठाते हुए पूछा कि कोयला घोटाले से जुड़े मामले में अंतिम बयान फरवरी 2024 में दर्ज हुआ था, लेकिन अचानक चुनाव के बीच इतनी दिलचस्पी क्यों दिखाई गई।

सिब्बल ने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री ने केवल अपना लैपटॉप और आईफोन ही साथ ले गए थे और सभी डिवाइस अपने कब्जे में लेने का आरोप गलत है।

सुप्रीम कोर्ट में आगे की सुनवाई

इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में लंच के बाद फिर सुनवाई होगी। अदालत से उम्मीद है कि मामले की आगे की दिशा तय होगी, जिसमें ईडी और टीएमसी दोनों पक्षों की दलीलों पर विचार किया जाएगा।

स्थिति का सार

  • ईडी ने ममता बनर्जी पर दस्तावेज चोरी और जांच में बाधा डालने का आरोप लगाया।
  • अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ने एफआईआर दर्ज करने और सीबीआई जांच कराने की मांग की।
  • टीएमसी ने आरोपों का खंडन किया और चुनावी संवेदनशीलता पर जोर दिया।
  • सुप्रीम कोर्ट में मामले की अगली सुनवाई लंच के बाद तय है।

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