डिलीवरी वर्कर्स को राहत की सांस, 10 मिनट डिलीवरी का दबाव हुआ खत्म

नई दिल्ली। देश के क्विक कॉमर्स क्षेत्र में काम कर रहे लाखों डिलीवरी वर्कर्स के लिए एक अहम और राहत भरा फैसला सामने आया है। केंद्र सरकार की सख्ती के बाद अब 10 मिनट में डिलीवरी पूरी करने की बाध्यता को खत्म कर दिया गया है। इसके चलते ब्लिंकिट, जोमैटो, स्विगी और जेप्टो जैसी बड़ी कंपनियों ने अपनी अल्ट्रा-फास्ट डिलीवरी नीतियों में बदलाव करने का निर्णय लिया है।

सरकार का यह कदम गिग वर्कर्स की सुरक्षा और स्वास्थ्य को प्राथमिकता देने की दिशा में उठाया गया है। केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि अत्यधिक कम समय में डिलीवरी करने का दबाव न केवल डिलीवरी पार्टनर्स के लिए खतरनाक था, बल्कि इससे सड़क दुर्घटनाओं और मानसिक तनाव की घटनाएं भी बढ़ रही थीं।

विशेषज्ञों का कहना है कि खराब मौसम, ट्रैफिक जाम और शहरी सड़कों की जटिल परिस्थितियों में समय की सख्त सीमा डिलीवरी वर्कर्स को जोखिम भरे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रही थी। लंबे समय से श्रमिक संगठनों और सामाजिक संगठनों द्वारा इस व्यवस्था में सुधार की मांग की जा रही थी।

गिग वर्कर्स के मुद्दे पर संसद में भी आवाज उठ चुकी है। हाल के सत्रों में ऐप आधारित डिलीवरी मॉडल पर सवाल खड़े करते हुए श्रमिकों के लिए सम्मानजनक कार्य वातावरण, उचित पारिश्रमिक और सामाजिक सुरक्षा की जरूरत पर जोर दिया गया था।

कानूनी रूप से गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स को सोशल सिक्योरिटी कोड 2020 के तहत पहले ही संरक्षण दिया जा चुका है। इसके अंतर्गत जीवन एवं दुर्घटना बीमा, स्वास्थ्य सुविधाएं, मातृत्व लाभ और वृद्धावस्था सुरक्षा जैसी योजनाओं का प्रावधान है। इसके साथ ही ई-श्रम पोर्टल के माध्यम से श्रमिकों का पंजीकरण कर उन्हें विभिन्न सरकारी योजनाओं से जोड़ा जा रहा है।

विशेषज्ञ मानते हैं कि 10 मिनट डिलीवरी की अनिवार्यता खत्म होने से न केवल डिलीवरी वर्कर्स की सुरक्षा सुनिश्चित होगी, बल्कि यह क्विक कॉमर्स सेक्टर को अधिक संतुलित और जिम्मेदार बनाने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।

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