सबरीमाला में कथित बदलाव पर चौंकाने वाला खुलासा, जांच के नतीजों से बढ़ी हलचल

तिरुवनंतपुरम: सबरीमाला मंदिर से जुड़े कथित सोना चोरी प्रकरण में की गई नवीन वैज्ञानिक जांच ने कई महीनों से चल रही अटकलों को खारिज कर दिया है। इसरो से जुड़े वैज्ञानिक परीक्षणों में यह स्पष्ट हुआ है कि गर्भगृह (संनिधानम) के दरवाजों के पैनल बदले नहीं गए थे, बल्कि उन पर चढ़ी सोने की परत को विशेष रासायनिक तकनीक के जरिए हटाया गया था।

ये निष्कर्ष विशेष जांच दल (एसआईटी) को सौंपे जा चुके हैं और बुधवार को केरल हाईकोर्ट के समक्ष भी प्रस्तुत किए गए। रिपोर्ट के सामने आने के बाद गर्भगृह की संरचना में छेड़छाड़ या इसे किसी बाहरी गिरोह को सौंपे जाने जैसी चर्चाओं को बल नहीं मिला है।

इसरो वैज्ञानिकों की रिपोर्ट में बड़ा खुलासा
विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र के विशेषज्ञों ने सामग्री विश्लेषण के बाद अदालत को अवगत कराया कि मंदिर के दरवाजों में लगी तांबे की चादरें मूल हैं। जांच में यह भी सामने आया कि जिसे लंबे समय तक ठोस सोने का पैनल माना जा रहा था, वह वास्तव में तांबे के ऊपर चढ़ाई गई सोने की परत थी।

वैज्ञानिकों ने बताया कि गर्भगृह के दरवाजे का लकड़ी का ढांचा, जिसे स्थानीय रूप से ‘कट्टिल’ कहा जाता है, पूरी तरह यथावत पाया गया है। हालांकि, जिन तांबे की चादरों को हटाकर दोबारा लगाया गया था, उनमें सोने की मात्रा अपेक्षाकृत कम पाई गई, जिससे यह संकेत मिलता है कि तांबे को क्षति पहुंचाए बिना सोना अलग किया गया।

रासायनिक प्रक्रिया से बदला रंग और बनावट
पैनलों की सतह पर दिख रहे रंग और बनावट में अंतर को लेकर उठे सवालों पर वैज्ञानिकों ने स्पष्ट किया कि यह बदलाव रासायनिक प्रतिक्रियाओं का परिणाम है। सोना निकालने की प्रक्रिया में उपयोग किए गए पारा (मरकरी) और अन्य रसायनों ने चादरों की सतह को प्रभावित किया, जिससे ऐसा दृश्य परिवर्तन दिखाई दिया। जांच में यह भी स्पष्ट हुआ कि मूल चादरों को हटाकर नई चादरें लगाए जाने का कोई सबूत नहीं मिला है।

जांच जारी, अब जिम्मेदारों की पहचान पर फोकस
एसआईटी ने हाईकोर्ट को बताया है कि मामले की जांच अभी पूरी नहीं हुई है। पुराने गर्भगृह दरवाजों से लिए गए नमूनों का तुलनात्मक अध्ययन किया जा रहा है और सभी वैज्ञानिक तथ्यों को जोड़कर एक अंतिम संयुक्त रिपोर्ट जल्द सौंपी जाएगी।

अधिकारियों का मानना है कि वैज्ञानिक साक्ष्य अब जांच की दिशा तय करेंगे और आगे का फोकस सोना निकालने की तकनीक तथा इसके पीछे शामिल व्यक्तियों की पहचान पर केंद्रित रहेगा।

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