Gmail-Facebook यूजर्स सावधान! इंटरनेट पर घूम रहा 15 करोड़ अकाउंट्स का डेटा

नई दिल्ली : डिजिटल दुनिया में हाल ही में सामने आई एक जानकारी ने यूजर्स की चिंता बढ़ा दी है। इंटरनेट पर करीब 15 करोड़ ईमेल आईडी और पासवर्ड एक ही जगह मौजूद पाए गए हैं। पहली नजर में यह मामला किसी बड़े और नए साइबर अटैक जैसा लगता है, लेकिन विशेषज्ञों के मुताबिक यह कोई ताजा हैकिंग घटना नहीं है।

रिपोर्ट्स बताती हैं कि यह डेटा किसी एक कंपनी या प्लेटफॉर्म के सिस्टम में सेंध लगाकर नहीं निकाला गया, बल्कि पिछले कई वर्षों में अलग-अलग वेबसाइट्स से हुए डेटा लीक को इकट्ठा कर एक बड़ा कलेक्शन बनाया गया है। यानी पुराने लीक हुए रिकॉर्ड्स को जोड़कर एक नई लिस्ट तैयार की गई है, जिसे अब दोबारा साझा किया जा रहा है।

सोशल मीडिया और ओटीटी यूजर्स क्यों चिंतित

इस खुलासे के बाद जीमेल, फेसबुक, इंस्टाग्राम, नेटफ्लिक्स और पेपाल जैसे प्लेटफॉर्म्स के यूजर्स ज्यादा सतर्क हो गए हैं। साइबर सुरक्षा जानकारों का कहना है कि असली खतरा उन लोगों को है जो हर वेबसाइट पर एक ही पासवर्ड का इस्तेमाल करते हैं। ऐसे मामलों में हैकर्स पुराने लीक हुए पासवर्ड के जरिए दूसरे अकाउंट्स को एक्सेस करने की कोशिश करते हैं। इस तकनीक को साइबर भाषा में “क्रेडेंशियल स्टफिंग” कहा जाता है।

कैसे करें अपने अकाउंट की जांच

यूजर्स के लिए राहत की बात यह है कि वे खुद यह जांच सकते हैं कि उनका डेटा कभी किसी लीक का हिस्सा बना है या नहीं। इसके लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त वेबसाइट Have I Been Pwned का उपयोग किया जा सकता है। इस प्लेटफॉर्म पर केवल अपना ईमेल एड्रेस डालने से पता चल जाता है कि वह किसी डेटा ब्रीच में शामिल रहा है या नहीं, साथ ही यह भी जानकारी मिलती है कि लीक कब और कहां हुआ था।

सुरक्षा के लिए क्या करें अभी

यदि जांच में आपका ईमेल या पासवर्ड किसी लीक में पाया जाता है, तो तुरंत घबराने की जरूरत नहीं है, बल्कि समझदारी से कदम उठाने होंगे। सबसे पहले संबंधित अकाउंट का पासवर्ड बदलें। यदि वही पासवर्ड आपने अन्य सेवाओं पर भी इस्तेमाल किया है, तो वहां भी बदलाव करें। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि हर प्लेटफॉर्म के लिए अलग और मजबूत पासवर्ड रखें और टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन (2FA) जरूर सक्रिय करें।

इसके अलावा, कई अकाउंट्स के पासवर्ड सुरक्षित तरीके से संभालने के लिए पासवर्ड मैनेजर टूल्स का उपयोग भी एक बेहतर विकल्प माना जाता है। सतर्कता और सही डिजिटल आदतें ही साइबर खतरों से बचाव का सबसे मजबूत तरीका हैं।

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