खनन क्षेत्र में भीषण भूस्खलन, पूर्वी कांगो में 200 लोगों की मौत से हड़कंप

गोमा/नई दिल्ली : पूर्वी कांगो के उत्तरी किवू प्रांत में स्थित रुबाया इलाके की कोल्टन खदानों में शुक्रवार को हुए भीषण भूस्खलन ने भयावह तबाही मचा दी। लगातार भारी बारिश के चलते अवैध और छोटे स्तर पर संचालित कई खदानें अचानक ढह गईं, जिससे कम से कम 200 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है। राहत एवं बचाव कार्य जारी है, लेकिन मलबे में अब भी कई लोगों के फंसे होने की आशंका बनी हुई है।

एम23 विद्रोही समूह द्वारा नियुक्त प्रशासन के प्रवक्ता लुमुम्बा कंबेरे मुयिसा ने बताया कि हालात बेहद गंभीर हैं और मृतकों की संख्या बढ़ सकती है। उन्होंने कहा कि कीचड़ और मलबे में दबे शवों को निकालना काफी मुश्किल हो रहा है। हादसे में जान गंवाने वालों में खनन मजदूरों के साथ-साथ स्थानीय बाजार में काम करने वाली महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं।

घायलों को गोमा किया जा रहा रेफर

भूस्खलन में लगभग 20 लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं, जिनका इलाज स्थानीय स्वास्थ्य केंद्रों में चल रहा है। गंभीर रूप से घायल लोगों को एंबुलेंस के जरिए गोमा शहर के बड़े अस्पतालों में भेजे जाने की तैयारी की जा रही है। एक प्रशासनिक अधिकारी ने बताया कि अंतिम आंकड़ा 225 से अधिक हो सकता है।

एम23 के नियंत्रण में हैं खदानें

रुबाया की कोल्टन खदानें फिलहाल एम23 विद्रोही समूह के कब्जे में हैं, जिसने अप्रैल 2024 से इस क्षेत्र पर नियंत्रण बना रखा है। यह इलाका वैश्विक स्तर पर अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि दुनिया के लगभग 15 प्रतिशत कोल्टन का उत्पादन यहीं से होता है। कोल्टन से प्राप्त टैंटलम का उपयोग मोबाइल फोन, कंप्यूटर और अन्य आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के निर्माण में किया जाता है।

यहां खनन अधिकतर छोटे पैमाने पर होता है, जहां मजदूर बिना पर्याप्त सुरक्षा उपकरणों के हाथों से खुदाई करते हैं। कम मजदूरी और कमजोर सुरक्षा व्यवस्था के चलते इस क्षेत्र में हादसों का खतरा हमेशा बना रहता है।

खनन पर अस्थायी प्रतिबंध

घटना के बाद एम23 द्वारा नियुक्त गवर्नर ने रुबाया क्षेत्र में छोटे पैमाने के खनन पर अस्थायी रोक लगाने के आदेश जारी किए हैं। साथ ही खदानों के आसपास बसे लोगों को सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित करने के निर्देश दिए गए हैं।

गौरतलब है कि पूर्वी कांगो वर्षों से सशस्त्र संघर्ष, राजनीतिक अस्थिरता और मानवीय संकट से जूझ रहा है। खनिज संपदा से भरपूर होने के बावजूद यहां के लोग गरीबी, असुरक्षा और प्राकृतिक आपदाओं की भारी कीमत चुका रहे हैं। रुबाया का यह हादसा एक बार फिर खनन क्षेत्रों में मजदूरों की बदहाल सुरक्षा व्यवस्था और मानवीय उपेक्षा को उजागर करता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *