Chhattisgarh high court : छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने लंबित जनहित याचिकाओं के शीघ्र निपटारे को लेकर एक अहम निर्णय लिया है। औद्योगिक क्षेत्रों में सीमेंट और लोहे की डस्ट से श्रमिकों के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों से जुड़ी जनहित याचिकाओं पर शुक्रवार को सुनवाई पूरी नहीं हो पाने के कारण अब इन मामलों की सुनवाई शनिवार को की जाएगी। अवकाश के बावजूद हाई कोर्ट की सभी बेंचों में नियमित न्यायिक कार्य जारी रहेगा।
शुक्रवार को मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा की अध्यक्षता वाली डिवीजन बेंच में इन जनहित याचिकाओं पर सुनवाई प्रस्तावित थी, लेकिन समयाभाव के चलते मामलों पर विस्तृत सुनवाई संभव नहीं हो सकी। इसे ध्यान में रखते हुए न्यायालय ने शनिवार को सुनवाई जारी रखने का निर्णय लिया है।
हाई कोर्ट प्रशासन के अनुसार, यह फैसला पूर्व में लिए गए एक अवकाश को समायोजित करने के उद्देश्य से भी लिया गया है, ताकि न्यायिक कार्य प्रभावित न हो और लंबित मामलों का शीघ्र निराकरण किया जा सके। मुख्य न्यायाधीश के निर्देश पर शनिवार को भी सभी बेंचों में नियमित मामलों की सुनवाई होगी।
गौरतलब है कि प्रदेश के विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों में कार्यरत श्रमिकों के स्वास्थ्य पर सीमेंट और लोहे की डस्ट के गंभीर प्रभावों को लेकर उत्कल सेवा समिति, लक्ष्मी चौहान, गोविंद अग्रवाल, अमरनाथ अग्रवाल सहित अन्य याचिकाकर्ताओं ने छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट में जनहित याचिकाएं दायर की हैं। याचिकाओं में विशेष रूप से श्रमिकों के फेफड़ों और श्वसन तंत्र पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों का उल्लेख किया गया है।
शनिवार को होने वाली सुनवाई में इन जनहित याचिकाओं पर विस्तृत बहस और आगे की कार्यवाही की संभावना है। हाई कोर्ट के इस कदम को न्यायिक प्रक्रिया में तेजी लाने और जनहित से जुड़े मामलों को प्राथमिकता देने के रूप में देखा जा रहा है।