Budget 2026: आयुर्वेद को अंतरराष्ट्रीय पहचान देने की तैयारी, देश में खुलेंगे तीन नए राष्ट्रीय संस्थान

नई दिल्ली: केंद्रीय बजट 2026-27 में सरकार ने आयुर्वेद और पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों को बढ़ावा देने के लिए बड़े कदम उठाए हैं। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में बजट पेश करते हुए घोषणा की कि देश में तीन नए ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ आयुर्वेद की स्थापना की जाएगी। सरकार का यह फैसला वैश्विक स्तर पर आयुर्वेदिक दवाओं की बढ़ती मांग को देखते हुए लिया गया है।

अपने बजट संबोधन में वित्त मंत्री ने कहा कि कोरोना महामारी के बाद दुनिया भर में आयुर्वेद के प्रति भरोसा तेजी से बढ़ा है। उन्होंने उल्लेख किया कि जिस तरह योग को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रयासों से अंतरराष्ट्रीय मंच पर पहचान मिली, उसी तरह अब आयुर्वेद भी वैश्विक स्वास्थ्य प्रणाली का अहम हिस्सा बनता जा रहा है।

सीतारमण ने बताया कि आयुर्वेदिक उत्पादों के निर्यात से औषधीय पौधों की खेती को बढ़ावा मिल रहा है, जिससे किसानों को नए अवसर मिल रहे हैं। साथ ही, प्रोसेसिंग और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में बड़े पैमाने पर रोजगार सृजित हो रहे हैं। इन्हीं जरूरतों को ध्यान में रखते हुए सरकार ने नए आयुर्वेद संस्थान खोलने का निर्णय लिया है।

फिलहाल राजधानी दिल्ली में स्थित ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ आयुर्वेद देश में उच्च स्तरीय आयुर्वेदिक उपचार और शोध का प्रमुख केंद्र है, और नए संस्थानों के खुलने से इस क्षेत्र में शिक्षा, शोध और इलाज की सुविधाएं और मजबूत होंगी।

इसके अलावा बजट में AYUSH फार्मेसियों और ड्रग टेस्टिंग प्रयोगशालाओं को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप विकसित करने की भी घोषणा की गई है। इसका उद्देश्य गुणवत्ता नियंत्रण के साथ-साथ प्रशिक्षित मानव संसाधन तैयार करना है। साथ ही, गुजरात के जामनगर में स्थित WHO ग्लोबल ट्रेडिशनल मेडिसिन सेंटर को और सक्षम बनाया जाएगा।

वित्त मंत्री ने बताया कि यह केंद्र पारंपरिक चिकित्सा के क्षेत्र में रिसर्च, प्रशिक्षण और जागरूकता के लिए एक वैश्विक मंच के रूप में काम कर रहा है और दुनिया में अपनी तरह का पहला अंतरराष्ट्रीय संस्थान है।

बजट में कपड़ा और हस्तशिल्प क्षेत्र को भी विशेष महत्व दिया गया है। सरकार ने ‘महात्मा गांधी हैंडलूम योजना’ शुरू करने का ऐलान किया है, जिसका उद्देश्य खादी, हैंडलूम और हस्तशिल्प उद्योग को नया संबल देना है। इस योजना से ग्रामीण इलाकों में रोजगार बढ़ाने और पारंपरिक कारीगरों की आमदनी सुधारने में मदद मिलने की उम्मीद है।

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