Aamlaki Ekadashi 2026 ; सनातन धर्म में एकादशी का व्रत अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। प्रत्येक माह में दो एकादशी आती हैं – एक कृष्ण पक्ष में और दूसरी शुक्ल पक्ष में। फरवरी महीने में भी दो एकादशी आती हैं, जिनमें से एक आमलकी एकादशी के रूप में विशेष रूप से जानी जाती है।
आमलकी एकादशी का महत्व
आमलकी एकादशी को रंगभरी एकादशी के नाम से भी पुकारा जाता है। इस दिन आंवले के वृक्ष में भगवान विष्णु का निवास माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन आंवले के वृक्ष की पूजा करने से भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है और सभी पापों का नाश होता है। इसके अलावा, इस व्रत से व्यक्ति के जीवन में सुख, समृद्धि और स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है।
पूजा का शुभ समय और विधि
काशी के ज्योतिषाचार्य पंडित संजय उपाध्याय के अनुसार, इस वर्ष आमलकी एकादशी 26 फरवरी को है। इस दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करना शुभ माना जाता है। इसके बाद भगवान विष्णु का ध्यान करके व्रत का संकल्प लेना चाहिए।

सनातन वैदिक पंचांग के अनुसार, आमलकी एकादशी के दिन सुबह 6:15 बजे से 9:40 बजे तक का समय पूजा के लिए सर्वोत्तम है। इस अवधि में भगवान विष्णु की पूजा करते समय आंवले के फल का अर्पण करना अनिवार्य माना गया है। ऐसा करने से व्यक्ति की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं और जीवन में सुख-शांति का आगमन होता है।

पूजन सामग्री
- आंवला (ताजा या फल के रूप में)
- दीपक और तेल/घी
- अगरबत्ती
- साफ कपड़ा या पूजा की चादर
- फूल, अक्षत (चावल), गुड़ या मिश्री
- भगवान विष्णु की मूर्ति या तस्वीर
तैयारी और समय
- व्रत से एक दिन पहले हल्का और सात्विक भोजन करें।
- आमलकी एकादशी के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें।
- पूजा का शुभ समय: सुबह 6:15 बजे से 9:40 बजे तक (पंचांग अनुसार)।
- व्रत के दौरान भगवान विष्णु के मंत्र या भजन का पाठ करें।
- “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय”