‘सॉरी पापा…’ सुसाइड नोट ने खोले राज, के-पॉप और ऑनलाइन गेमिंग की लत ने ली तीन सगी बहनों की जान

गाजियाबाद। उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले में एक दर्दनाक घटना ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है। टीला मोड़ थाना क्षेत्र की भारत सिटी सोसाइटी में रहने वाली तीन सगी बहनों की एक साथ मौत से हड़कंप मच गया। तीनों ने कथित तौर पर सोसाइटी की नौवीं मंजिल से छलांग लगा दी, जिससे मौके पर ही उनकी मौत हो गई।

घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची। जांच के दौरान पुलिस को एक पॉकेट डायरी मिली, जिसमें कई पन्नों में लिखा एक सुसाइड नोट बरामद हुआ है। नोट की सामग्री ने जांच को एक नई दिशा दी है और डिजिटल दुनिया के प्रभाव को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

सुसाइड नोट में मानसिक तनाव के संकेत
पुलिस के अनुसार डायरी में लिखे नोट से यह सामने आया है कि तीनों बहनें लंबे समय से मानसिक तनाव से जूझ रही थीं। वे खुद को पारिवारिक और सामाजिक अपेक्षाओं से कटा हुआ महसूस कर रही थीं। नोट में परिवार से माफी मांगने के साथ-साथ अपनी मानसिक स्थिति का भी उल्लेख किया गया है।

डिजिटल कंटेंट से अत्यधिक जुड़ाव
जांच में यह भी सामने आया है कि तीनों बहनों का ऑनलाइन कंटेंट, विदेशी मनोरंजन और सोशल मीडिया से गहरा जुड़ाव था। वे घंटों मोबाइल और इंटरनेट पर समय बिताती थीं, जिससे उनका सामाजिक दायरा सीमित होता चला गया। पुलिस इस पहलू की गंभीरता से जांच कर रही है कि कहीं यह अत्यधिक ऑनलाइन निर्भरता उनके मानसिक स्वास्थ्य पर तो असर नहीं डाल रही थी।

साइबर एंगल की जांच जारी
पुलिस ने तीनों के मोबाइल फोन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त कर लिए हैं। साइबर सेल यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या वे किसी ऑनलाइन समूह, चैट या डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से किसी तरह के दबाव, भ्रम या उकसावे का शिकार तो नहीं हुई थीं। फिलहाल किसी बाहरी व्यक्ति की सीधी भूमिका के स्पष्ट सबूत नहीं मिले हैं।

परिवार और इलाके में मातम
इस घटना के बाद परिवार गहरे सदमे में है। सोसाइटी के लोग और पड़ोसी भी स्तब्ध हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि तीनों बहनें सामान्य दिखती थीं और किसी को अंदेशा नहीं था कि ऐसा कदम उठाया जा सकता है।

मानसिक स्वास्थ्य पर फिर चिंता
विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटना बच्चों और युवाओं में बढ़ते मानसिक दबाव, डिजिटल निर्भरता और संवाद की कमी की ओर इशारा करती है। उनका कहना है कि समय रहते भावनात्मक सहयोग, खुला संवाद और मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान देकर ऐसी त्रासदियों को रोका जा सकता है।

पुलिस ने मामले में जांच जारी रखने की बात कही है और सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर तथ्य जुटाए जा रहे हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *