नई दिल्ली। भारत और अमेरिका के बीच एक अहम अंतरिम व्यापार समझौते को अंतिम रूप दे दिया गया है, जिसे दोनों देशों के आर्थिक रिश्तों के लिए बड़ा कदम माना जा रहा है। इस समझौते के तहत अमेरिका भारतीय उत्पादों पर लगाए जाने वाले टैरिफ में उल्लेखनीय कटौती करेगा, जिससे भारत के निर्यात को वैश्विक बाजार में नई मजबूती मिलने की उम्मीद है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को इस समझौते का स्वागत करते हुए इसे दोनों देशों के लिए सकारात्मक और भविष्यदर्शी करार दिया। उन्होंने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर कहा कि भारत और अमेरिका ने व्यापार समझौते की एक ठोस रूपरेखा पर सहमति बनाई है, जो आपसी विश्वास, सहयोग और बढ़ती साझेदारी को दर्शाती है। प्रधानमंत्री ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रति भी आभार व्यक्त किया और कहा कि यह पहल दोनों देशों के रिश्तों को नई ऊंचाई देगी।
प्रधानमंत्री ने कहा कि यह समझौता ‘मेक इन इंडिया’ को और सशक्त करेगा तथा किसानों, एमएसएमई, स्टार्टअप्स, उद्यमियों, मछुआरों और नवाचार से जुड़े लोगों के लिए नए अवसर पैदा करेगा। साथ ही इससे युवाओं और महिलाओं के लिए रोजगार के व्यापक अवसर सृजित होंगे। उन्होंने यह भी कहा कि यह समझौता मजबूत सप्लाई चेन विकसित करने और वैश्विक विकास में योगदान देने में मददगार साबित होगा।
इससे पहले केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने भी इस व्यापार समझौते को भारत–अमेरिका आर्थिक सहयोग के लिए महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि इस समझौते के अंतर्गत अमेरिकी बाजार में भारतीय वस्तुओं पर लगने वाला टैरिफ घटकर 18 प्रतिशत रह जाएगा, जिससे टेक्सटाइल, परिधान, चमड़ा, फुटवियर, प्लास्टिक, रबर उत्पाद, केमिकल्स, होम डेकोर, हस्तशिल्प और मशीनरी जैसे क्षेत्रों को बड़ा फायदा मिलेगा।
पीयूष गोयल ने बताया कि जेनेरिक दवाएं, रत्न एवं आभूषण, हीरे और विमान पुर्जों जैसे कई उत्पादों पर टैरिफ शून्य हो जाएगा, जिससे भारत की निर्यात प्रतिस्पर्धा और मजबूत होगी। इसके अलावा सेक्शन 232 के तहत विमान पुर्जों पर छूट और ऑटो पार्ट्स पर टैरिफ रेट कोटा जैसे प्रावधानों से भी भारतीय उद्योगों को लाभ मिलेगा।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस समझौते में भारत के संवेदनशील कृषि और डेयरी उत्पादों को पूरी तरह सुरक्षित रखा गया है, जिससे किसानों और ग्रामीण आजीविका के हितों की रक्षा सुनिश्चित होगी।
कुल मिलाकर, यह अंतरिम व्यापार समझौता भारत और अमेरिका के बीच आर्थिक साझेदारी को नई दिशा देने वाला माना जा रहा है, जो दीर्घकाल में निवेश, तकनीक और रोजगार के नए अवसर पैदा करेगा।