नई दिल्ली। अमेरिका के न्याय विभाग द्वारा सार्वजनिक किए गए कुछ दस्तावेज़ों में दिवंगत अमेरिकी फाइनेंसर जेफ्री एपस्टीन और भारतीय उद्योगपति अनिल अंबानी के बीच हुए कथित संवादों का उल्लेख सामने आया है। इन दस्तावेज़ों के अनुसार, वर्ष 2017 से 2019 के बीच दोनों के बीच टेक्स्ट मैसेज के माध्यम से संवाद हुआ, जिसमें अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम, कारोबारी विषयों, निजी रुचियों और संभावित मुलाकातों पर चर्चा शामिल थी।
ब्लूमबर्ग रिपोर्ट में सामने आई बातचीत
ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक, मार्च 2017 में अनिल अंबानी द्वारा भेजे गए एक संदेश में एपस्टीन से किसी व्यक्ति की सिफारिश के बारे में पूछा गया था। इसके जवाब में एपस्टीन ने एक आपत्तिजनक टिप्पणी की थी, जिस पर अंबानी की ओर से संक्षिप्त प्रतिक्रिया दर्ज की गई। रिपोर्ट में कहा गया है कि यह बातचीत अमेरिकी दस्तावेज़ों का हिस्सा है, जिन्हें हाल ही में सार्वजनिक किया गया।
यूरोप और अमेरिका में मुलाकातों के संकेत
दस्तावेज़ों से यह भी संकेत मिलता है कि वर्ष 2017 में पेरिस में संभावित मुलाकात को लेकर दोनों के बीच संवाद हुआ था, हालांकि यह बैठक नहीं हो सकी। इसके बाद जनवरी 2018 में स्विट्ज़रलैंड के दावोस में आयोजित विश्व आर्थिक मंच के दौरान वैश्विक राजनीति, विशेष रूप से उस समय के अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से जुड़ी प्रतिक्रियाओं पर भी संदेशों का आदान-प्रदान हुआ।
मई 2019 में अनिल अंबानी की न्यूयॉर्क यात्रा के दौरान एपस्टीन ने उनसे मिलने का प्रस्ताव भेजा था। दस्तावेज़ों में यह भी दर्ज है कि एपस्टीन ने निजी मुलाकातों की व्यवस्था कराने की पेशकश की थी। एपस्टीन के पूर्व सहयोगियों के हवाले से यह उल्लेख किया गया है कि मैनहैटन स्थित उनके आवास पर दोनों की मुलाकात हुई थी। इस पूरे प्रकरण पर अनिल अंबानी के प्रतिनिधियों ने कोई टिप्पणी नहीं की है।
किताबों से शुरू हुआ परिचय
ब्लूमबर्ग न्यूज के अनुसार, मार्च 2017 में एपस्टीन द्वारा कुछ डिजिटल पुस्तकों को मंगवाया गया था, जिनमें अंबानी परिवार और रिलायंस समूह के इतिहास से जुड़ी किताबें शामिल थीं। माना जा रहा है कि इन्हीं स्रोतों से एपस्टीन को अंबानी परिवार की कारोबारी पृष्ठभूमि की जानकारी मिली।
अंबानी भाइयों का कारोबारी विभाजन
गौरतलब है कि धीरूभाई अंबानी के निधन के बाद वर्ष 2002 में अनिल अंबानी और मुकेश अंबानी के बीच पारिवारिक व्यवसाय का विभाजन हुआ था। इसके बाद अनिल अंबानी ने रिलायंस समूह के इंफ्रास्ट्रक्चर, ऊर्जा और रक्षा जैसे क्षेत्रों की जिम्मेदारी संभाली, जबकि मुकेश अंबानी के नेतृत्व में रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड ने तेल, पेट्रोकेमिकल्स, टेलीकॉम, रिटेल और मीडिया जैसे क्षेत्रों में विस्तार किया।
आर्थिक उतार-चढ़ाव और कानूनी चुनौतियां
बीते वर्षों में दोनों भाइयों की आर्थिक स्थिति में बड़ा अंतर देखा गया है। जहां मुकेश अंबानी विश्व के शीर्ष उद्योगपतियों में शामिल हैं, वहीं अनिल अंबानी की कई कंपनियां वित्तीय संकट से गुजरी हैं। वर्ष 2019 में एक कानूनी विवाद के दौरान वे जेल जाने से बचे थे, जब उनके भाई मुकेश अंबानी ने अदालत के आदेश पर एक बड़ी राशि का भुगतान किया था। वर्तमान में भारत में उनकी कुछ कंपनियों से जुड़े ऋण मामलों की जांच विभिन्न एजेंसियों द्वारा की जा रही है। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने कथित ऋण धोखाधड़ी से जुड़े मामलों में जांच तेज करने के निर्देश भी दिए हैं।
निजी विषयों पर संवाद का उल्लेख
दस्तावेज़ों में यह भी दर्ज है कि 2017 की बातचीत के दौरान निजी पसंद और हॉलीवुड से जुड़े व्यावसायिक संबंधों का जिक्र हुआ था। उस समय रिलायंस एंटरटेनमेंट द्वारा सह-निर्मित एक हॉलीवुड फिल्म का संदर्भ भी इन संदेशों में आया था।
यह मामला अमेरिकी दस्तावेज़ों के सार्वजनिक होने के बाद चर्चा में आया है, हालांकि अब तक इस पर अनिल अंबानी या उनकी ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।