RSS की ताकत से भाजपा को मिले ‘अच्छे दिन’, राम मंदिर से भी मिला बड़ा राजनीतिक लाभ: मोहन भागवत

नई दिल्ली। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने संघ और भारतीय जनता पार्टी के रिश्तों को लेकर एक बार फिर दो टूक संदेश दिया है। उन्होंने कहा कि भाजपा की राजनीतिक सफलता किसी एक दौर की रणनीति नहीं, बल्कि आरएसएस की दशकों लंबी साधना और संगठनात्मक समर्पण का प्रतिफल है।

भागवत का यह वक्तव्य उस पृष्ठभूमि में अहम माना जा रहा है, जब पिछले लोकसभा चुनावों के दौरान भाजपा के तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष जे.पी. नड्डा के एक बयान के बाद संघ और पार्टी के संबंधों को लेकर चर्चाएं तेज हो गई थीं। उस समय संघ के भीतर असहजता की स्थिति भी सामने आई थी। सरसंघचालक के ताज़ा बयान को उसी संदर्भ में संगठनात्मक स्पष्टता के रूप में देखा जा रहा है।

उन्होंने कहा कि राम मंदिर आंदोलन केवल एक राजनीतिक घटना नहीं था, बल्कि यह संघ के निरंतर सामाजिक-सांस्कृतिक प्रयासों का परिणाम था। जो भी इस विचार और आंदोलन से जुड़ा, उसे जनसमर्थन और राजनीतिक स्वीकार्यता स्वतः प्राप्त हुई। भागवत ने संकेतों में यह भी कहा कि विचारधारा से जुड़े आंदोलनों का असर चुनावी राजनीति पर पड़ना स्वाभाविक है।

सरसंघचालक ने यह स्पष्ट किया कि भाजपा की वैचारिक जड़ें आज भी आरएसएस में ही निहित हैं और संघ उसका मूल प्रेरणा स्रोत बना हुआ है। हालांकि उन्होंने यह भी दोहराया कि भाजपा एक स्वतंत्र राजनीतिक दल है, जिसके निर्णयों में संघ का कोई प्रत्यक्ष हस्तक्षेप नहीं होता।

भागवत ने कहा कि संघ स्वयंसेवक उपलब्ध कराता है, लेकिन राजनीतिक फैसले पार्टी नेतृत्व द्वारा ही लिए जाते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा अपनी राजनीतिक दिशा तय करती है, जबकि संघ सामाजिक संगठन के रूप में अपने दायित्वों का निर्वहन करता है।

उन्होंने स्वयंसेवकों के जीवन समर्पण पर प्रकाश डालते हुए कहा कि संघ कार्यकर्ताओं का जीवन पूरी तरह संगठन को समर्पित होता है। परिवारजन भी इस बात को स्वीकार करते हैं कि स्वयंसेवकों के लिए संघ का कार्य ही सर्वोच्च प्राथमिकता है। संघ का उद्देश्य केवल हिंदू समाज को संगठित करना है, न कि सत्ता प्राप्त करना।

संघ संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार के विचारों को याद करते हुए भागवत ने कहा कि उनका मानना था कि संघ स्वयं कुछ नहीं करेगा, लेकिन उसके स्वयंसेवक समाज में कोई भी काम अधूरा नहीं छोड़ेंगे। आज संघ के कार्यकर्ता समाज के हर क्षेत्र में सक्रिय हैं और वे राष्ट्रहित में अपने-अपने स्तर पर योगदान दे रहे हैं।

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