उखरुल, मणिपुर। मणिपुर के उखरुल जिले में उग्रवादियों की गतिविधियों से हालात गंभीर बने हुए हैं। लिटान सारेइखोंग इलाके में हथियारबंद समूहों ने खाली मकानों में आग लगाई और फायरिंग की, जिससे स्थानीय लोगों में भय और दहशत का माहौल पैदा हो गया। यह हिंसा उस समय बढ़ी जब तांगखुल नगा समुदाय के एक सदस्य पर हमला हुआ।
इंटरनेट और कर्फ्यू से नियंत्रण की कोशिश
राज्य प्रशासन ने सुरक्षा परिस्थितियों को देखते हुए जिले में पांच दिन के लिए इंटरनेट सेवाएं निलंबित कर दी हैं। इसके साथ ही पूरे जिले में कर्फ्यू लागू किया गया है। अधिकारियों ने बताया कि ब्रॉडबैंड, वीपीएन और वी-सैट आधारित इंटरनेट सेवाओं को भी अस्थायी रूप से बंद किया गया है, ताकि अफवाहों और हिंसा के फैलाव को रोका जा सके।
पिछले तनाव की पृष्ठभूमि
पुलिस सूत्रों के अनुसार, यह घटना उस फैसले के एक दिन बाद हुई, जिसमें तांगखुल नगा समुदाय के दो संगठनों ने उखरुल और कामजोंग जिलों में कुकी समुदाय की आवाजाही पर पाबंदी लगाई थी। इस कदम के बाद इलाके में तनाव तेजी से बढ़ गया।
स्थानीय लोग सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन
हिंसा के चलते स्थानीय निवासी अपने घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों की ओर भाग रहे हैं। विशेषकर महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग बड़े पैमाने पर पलायन कर रहे हैं। कई परिवार कुकी बहुल कांगपोकपी जिले के मोटबुंग और सैकुल इलाकों में शरण लेने को मजबूर हुए हैं।
सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो में देखा जा रहा है कि पहाड़ी इलाकों में आग और धुआं फैल रहा है, जिससे स्थिति और भयावह प्रतीत हो रही है।
सरकारी और पुलिस प्रतिक्रिया
मणिपुर के मंत्री गोविंदास कोंथौजाम ने बताया कि अब तक कम से कम 21 मकान जलाए जा चुके हैं। प्रशासन ने अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती की है और पूरी तरह से सतर्क रहने का दावा किया है।
सुरक्षा अधिकारी लोगों से अपील कर रहे हैं कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और प्रशासन द्वारा जारी निर्देशों का पालन करें।
इस हिंसा के बीच राज्य सरकार ने यह स्पष्ट किया है कि स्थिति पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है और किसी भी स्थिति में कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।