Shiv Parvati Vivah : सनातन परंपरा में महाशिवरात्रि को अत्यंत पवित्र और फलदायी पर्व माना गया है। देशभर में यह उत्सव श्रद्धा, आस्था और उल्लास के साथ मनाया जाता है। मंदिरों में विशेष सजावट की जाती है, रात्रि जागरण होता है और कई स्थानों पर आकर्षक शिव बारात भी निकाली जाती है, जिसमें श्रद्धालु बढ़-चढ़कर भाग लेते हैं।
धार्मिक मान्यता है कि इसी पावन तिथि पर भगवान शिव और माता पार्वती का दिव्य विवाह संपन्न हुआ था। इसलिए इस दिन शिव-पार्वती की संयुक्त आराधना का विशेष महत्व बताया गया है। मान्यता है कि जो दंपति इस दिन श्रद्धापूर्वक पूजा करते हैं, उनके जीवन में प्रेम, सौहार्द और सुख-समृद्धि बनी रहती है। वहीं अविवाहित कन्याएं यदि विधि-विधान से व्रत रखकर पूजा करें तो उन्हें योग्य जीवनसाथी का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
पंचांग के अनुसार महाशिवरात्रि माघ मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाई जाती है। इस वर्ष यह पावन पर्व 15 फरवरी को मनाया जाएगा। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार इस दिन सायं 5:04 बजे से अगले दिन प्रातः 5:23 बजे तक भद्रा का योग रहेगा, किंतु भद्रा का वास पाताल लोक में होने के कारण इसका प्रभाव पृथ्वी लोक पर नहीं माना जा रहा है। ऐसे में श्रद्धालु बिना किसी संकोच के पूजा-अर्चना कर सकते हैं।
महाशिवरात्रि केवल एक धार्मिक अनुष्ठान भर नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि और संयम का भी संदेश देती है। व्रत, ध्यान और रात्रि जागरण के माध्यम से भक्त अपने मन और इंद्रियों पर नियंत्रण रखने का अभ्यास करते हैं। शिवपुराण में उल्लेख है कि इस दिन सच्चे मन से की गई शिवभक्ति का फल अनेक व्रतों और तप के बराबर माना गया है।
इस पावन अवसर पर श्रद्धालु बेलपत्र, धतूरा, दूध और जल से भगवान शिव का अभिषेक करते हैं तथा माता पार्वती की पूजा कर परिवार की सुख-शांति की कामना करते हैं। महाशिवरात्रि का यह पर्व भक्ति, आस्था और सकारात्मक ऊर्जा से जीवन को आलोकित करने का संदेश देता है।