नई दिल्ली : भारत ने स्वास्थ्य तकनीक के क्षेत्र में एक नई मिसाल कायम की है। नई दिल्ली स्थित All India Institute of Medical Sciences (एम्स) के विशेषज्ञों ने हजारों किलोमीटर दूर बैठे मरीज का सफल रिमोट अल्ट्रासाउंड कर यह साबित कर दिया कि अब इलाज भौगोलिक सीमाओं का मोहताज नहीं रहा। यह प्रक्रिया अंटार्कटिका में भारत के ‘मैत्री’ अनुसंधान केंद्र पर मौजूद एक व्यक्ति पर की गई, जबकि डॉक्टर दिल्ली में मौजूद थे। दोनों के बीच की दूरी लगभग 12,000 किलोमीटर से अधिक थी।
एआई और टेली-रोबोटिक्स का सटीक तालमेल
इस उपलब्धि के पीछे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से संचालित अत्याधुनिक टेली-रोबोटिक सिस्टम की अहम भूमिका रही। दिल्ली में बैठे डॉक्टर ने रोबोटिक आर्म के माध्यम से वहां मौजूद अल्ट्रासाउंड प्रोब को नियंत्रित किया। प्रोब की हर हलचल और शरीर पर पड़ने वाले दबाव की जानकारी तुरंत डॉक्टर तक पहुंच रही थी, जिससे जांच पूरी तरह सटीक और सुरक्षित तरीके से संभव हो सकी।
इस प्रणाली को Indian Institute of Technology Delhi और National Centre for Polar and Ocean Research के सहयोग से विकसित किया गया। तकनीक में एआई की मदद से स्कैनिंग के दौरान स्थिरता और स्पष्ट इमेजिंग सुनिश्चित की गई।
रिसर्च डे पर हुआ लाइव प्रदर्शन
फरवरी 2026 में एम्स के ‘रिसर्च डे’ कार्यक्रम के दौरान इस तकनीक का लाइव प्रदर्शन किया गया। परियोजना का नेतृत्व डॉ. चंद्रशेखर एस.एच. ने किया, जबकि टेली-रोबोटिक सिस्टम के विकास में आईआईटी दिल्ली के डॉ. सुबीर कुमार साहा और उनकी टीम की प्रमुख भूमिका रही। अंटार्कटिका में तकनीक के कार्यान्वयन की रणनीति तैयार करने में आरजीएसएसएच के विशेषज्ञों ने भी सहयोग दिया।
केंद्रीय मंत्री Jitendra Singh ने इस उपलब्धि को देश की वैज्ञानिक क्षमता का प्रतीक बताते हुए टीम की सराहना की।
अंतरिक्ष और दूरदराज़ क्षेत्रों के लिए नई उम्मीद
विशेषज्ञों का मानना है कि अंटार्कटिका जैसी कठिन परिस्थितियों में इस तकनीक की सफलता भविष्य के अंतरिक्ष अभियानों के लिए भी महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। इस क्षेत्र को अक्सर ‘स्पेस एनालॉग’ कहा जाता है, क्योंकि यहां की परिस्थितियां अंतरिक्ष जैसी चुनौतियों से मेल खाती हैं।
यह उपलब्धि दर्शाती है कि अब जटिल चिकित्सा जांच भी दूर बैठे विशेषज्ञों द्वारा संभव है। आने वाले समय में इसका लाभ पहाड़ी और दूरस्थ इलाकों, आपदा प्रभावित क्षेत्रों और यहां तक कि चंद्रमा व मंगल जैसे अंतरिक्ष मिशनों में भी मिल सकता है। तकनीक के इस नए अध्याय ने स्वास्थ्य सेवाओं को वास्तव में वैश्विक और सीमाहीन बना दिया है।