नई दिल्ली: साल की शुरुआत में कीमती धातुओं के बाजार में असामान्य हलचल ने निवेशकों को चौंका दिया है। खासतौर पर चांदी की कीमतों में बेहद तीव्र उतार-चढ़ाव दर्ज किया गया, जिससे वायदा कारोबार से जुड़े प्रतिभागियों को भारी जोखिम का सामना करना पड़ा। विशेषज्ञों का कहना है कि इतनी तेज और अनियमित चाल पहले कम ही देखने को मिलती थी।
जनवरी के अंतिम सप्ताह में चांदी ने ऊंचा स्तर छुआ, लेकिन इसके तुरंत बाद बिकवाली का दबाव बढ़ गया। महज दो दिनों के भीतर कीमतों में एक लाख रुपये से अधिक की गिरावट दर्ज की गई। कुछ सत्रों में तो भाव घंटे-दर-घंटे बदलते रहे—कभी तेज गिरावट, तो कभी अचानक रिकवरी। इस उतार-चढ़ाव ने बाजार में अनिश्चितता का माहौल बना दिया।
रात के कारोबार के दौरान भी बड़े झटके देखने को मिले, जब थोड़े समय में भारी गिरावट आई और फिर आंशिक सुधार हुआ। विश्लेषकों का मानना है कि वैश्विक संकेत, डॉलर की चाल, औद्योगिक मांग और सट्टा गतिविधियों ने मिलकर इस अस्थिरता को बढ़ाया।
पिछले कुछ हफ्तों में कुल मिलाकर चांदी में बड़ी गिरावट दर्ज की जा चुकी है, जिससे थोक निवेश करने वालों को खासा नुकसान हुआ है। इसके विपरीत, सोने की कीमतों में अपेक्षाकृत स्थिरता देखी गई और उसमें सीमित दायरे में ही उतार-चढ़ाव रहा।
बाजार विशेषज्ञों का सुझाव है कि मौजूदा परिस्थितियों में निवेशकों को सतर्क रणनीति अपनानी चाहिए और अल्पकालिक तेजी या गिरावट के आधार पर बड़े फैसले लेने से बचना चाहिए।