राष्ट्रपति मुर्मु ने की त्रिपक्षीय वार्ता, तकनीक और नवाचार पर विशेष चर्चा

नई दिल्ली :  भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने बुधवार को राष्ट्रपति भवन में स्लोवाक गणराज्य के राष्ट्रपति पीटर पेलेग्रिनी और सर्बिया के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर वुसिक के साथ अलग-अलग औपचारिक बैठकों का आयोजन किया। दोनों दौरों में एआई, डिजिटल तकनीक, व्यापार, निवेश और बहुपक्षीय सहयोग को मजबूत करने पर व्यापक विचार-विमर्श हुआ।

भारत-स्लोवाकिया सहयोग में नई पहल

राष्ट्रपति मुर्मु ने अपने स्लोवाक समकक्ष का स्वागत करते हुए पिछले आधिकारिक दौरों की यादें साझा कीं और आपसी संबंधों को मजबूत करने के लिए धन्यवाद दिया। उन्होंने ‘एआई इम्पैक्ट समिट’ में स्लोवाकिया की सक्रिय भागीदारी की सराहना की और कहा कि यह समय कृत्रिम बुद्धिमत्ता के जिम्मेदार और समावेशी उपयोग को सुनिश्चित करने के लिए निर्णायक है।

राष्ट्रपति ने उल्लेख किया कि यह शिखर सम्मेलन “लोग, ग्रह और प्रगति” के सिद्धांतों पर आधारित है और भारत का दृष्टिकोण यह है कि तकनीक का लाभ सभी तक पहुँचना चाहिए। उन्होंने कहा कि एआई और डिजिटल प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भारत-स्लोवाकिया सहयोग वैश्विक स्तर पर महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है।

व्यापार, विज्ञान और रक्षा में सहयोग को बढ़ावा

राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि भारत और स्लोवाक गणराज्य के बीच व्यापार, निवेश, विज्ञान और प्रौद्योगिकी, रक्षा तथा जनसंपर्क के क्षेत्रों में लगातार मजबूती आई है। दोनों नेताओं ने इस यात्रा को द्विपक्षीय सहयोग को नई गति देने वाला कदम बताया और डिजिटल सहयोग में नए आयाम जोड़ने पर सहमति जताई।

भारत-सर्बिया संबंधों की ऐतिहासिक गहराई

सर्बिया के राष्ट्रपति के साथ वार्ता में राष्ट्रपति मुर्मु ने जून 2023 की अपनी सर्बिया यात्रा की यादें साझा कीं और वहां मिले स्वागत के लिए आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि गुटनिरपेक्ष आंदोलन की सह-संस्थापक भूमिका से लेकर आज ग्लोबल साउथ में साझेदारी तक, भारत और सर्बिया के रिश्ते हमेशा विशेष और ऐतिहासिक रहे हैं।

एआई, व्यापार और निवेश में भविष्य की संभावनाएँ

राष्ट्रपति ने कहा कि एआई और उभरती प्रौद्योगिकियों में दोनों देशों के बीच सहयोग के बड़े अवसर हैं। उन्होंने व्यापार और निवेश के क्षेत्र में विस्तार की संभावनाओं को भी रेखांकित किया, जिसमें सूचना प्रौद्योगिकी, विनिर्माण, कृषि, जैव-प्रौद्योगिकी, फार्मास्यूटिकल्स, पर्यटन और शिक्षा को प्राथमिकता दी जा सकती है।

साझा समृद्धि के लिए नई दिशा

दोनों राष्ट्राध्यक्षों ने पारस्परिक लाभ और साझा समृद्धि के लिए निरंतर सहयोग करने पर जोर दिया। बैठकों में नवाचार, तकनीकी सहयोग और लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने को विशेष महत्व दिया गया।

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