उत्तर प्रदेश : उत्तर प्रदेश विधानसभा में वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट पर चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि राज्य सरकार ने बीते वर्षों में वित्तीय अनुशासन को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। उन्होंने दावा किया कि राजकोषीय प्रबंधन में सुधार, भ्रष्टाचार पर नियंत्रण और संसाधनों के प्रभावी उपयोग से प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई दिशा मिली है।
‘नीति, नीयत और पारदर्शिता’ से बदला परसेप्शन
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश की छवि में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सकारात्मक बदलाव आया है। पहले जहां प्रदेश को अव्यवस्था और वित्तीय अनिश्चितता से जोड़ा जाता था, वहीं अब इसे निवेश और विकास के अनुकूल राज्य के रूप में देखा जा रहा है। उनके अनुसार स्पष्ट नीतियों और जवाबदेह प्रशासन ने यह परिवर्तन संभव किया।
किसानों की कर्जमाफी का उदाहरण
योगी आदित्यनाथ ने वर्ष 2017 में लघु और सीमांत किसानों की कर्जमाफी योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि 86 लाख किसानों को एक लाख रुपये तक की राहत दी गई थी। उन्होंने इसे बजट संसाधनों के भीतर रहकर लागू किया गया निर्णय बताया और कहा कि इससे सरकार की वित्तीय क्षमता और प्रबंधन कौशल का परिचय मिला।
वित्तीय प्रणाली में संरचनात्मक सुधार
मुख्यमंत्री ने बताया कि पर्सनल लेजर अकाउंट (PLA) प्रणाली में सुधार कर अनावश्यक धनराशि के निष्क्रिय पड़े रहने की प्रवृत्ति को समाप्त किया गया। अब योजनाओं के लिए आवश्यकता के अनुरूप ही धनराशि जारी की जाती है। साथ ही, भारतीय रिजर्व बैंक के दिशा-निर्देशों का पालन सुनिश्चित कर वित्तीय संतुलन बनाए रखा गया है।
क्रेडिट-डिपॉजिट अनुपात में सुधार
उन्होंने कहा कि राज्य का क्रेडिट-डिपॉजिट रेशियो पहले 43-44 प्रतिशत के आसपास था, जो अब बढ़कर 61-62 प्रतिशत तक पहुंच गया है। इसका मतलब है कि बैंकों में जमा धन का बड़ा हिस्सा प्रदेश में ही निवेश हो रहा है, जिससे उद्योग, व्यापार और स्वरोजगार को प्रोत्साहन मिला है।
विकास के बड़े लक्ष्य
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने दीर्घकालिक विकास को ध्यान में रखते हुए पूंजीगत निवेश और आधारभूत संरचना पर विशेष ध्यान दिया है। उनके अनुसार वित्तीय अनुशासन और पारदर्शिता के संयोजन ने उत्तर प्रदेश को देश के अग्रणी राज्यों की श्रेणी में खड़ा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।