रायपुर : छत्तीसगढ़ सरकार ने शासकीय कार्यालयों में बिजली प्रबंधन को लेकर बड़ा प्रशासनिक फैसला लिया है। राज्य में 1 अप्रैल 2026 से सभी सरकारी दफ्तरों में प्रीपेड बिजली प्रणाली लागू की जाएगी। नई व्यवस्था के तहत कार्यालयों को बिजली उपयोग से पहले निर्धारित राशि का रिचार्ज कराना होगा, ठीक मोबाइल सेवा की तर्ज पर।
ऊर्जा विभाग के मुताबिक, प्रीपेड स्मार्ट मीटर लगाए जाने के बाद यदि रिचार्ज की गई राशि समाप्त हो जाती है तो बिजली आपूर्ति स्वतः बंद हो जाएगी। इससे विभागों को समय पर भुगतान सुनिश्चित करने के साथ-साथ बिजली खपत पर भी अनुशासन बनाए रखने में मदद मिलेगी।
45 हजार से अधिक कार्यालय होंगे शामिल
सरकार की योजना के अनुसार राज्यभर के लगभग 45,000 से अधिक शासकीय कार्यालय इस प्रणाली के दायरे में लाए जाएंगे। अधिकारियों का कहना है कि इससे लंबित बिजली बिलों की समस्या काफी हद तक समाप्त हो सकती है और राजस्व वसूली में भी सुधार होगा।
पारदर्शिता और नियंत्रण पर जोर
प्रीपेड मीटर के माध्यम से प्रत्येक कार्यालय अपनी वास्तविक खपत के अनुसार भुगतान करेगा, जिससे अनावश्यक उपयोग पर अंकुश लगेगा। ऊर्जा विभाग का मानना है कि यह कदम बिजली वितरण कंपनियों की वित्तीय स्थिति को मजबूत करने में भी सहायक होगा।
भविष्य में विस्तार की संभावना
सरकार इस मॉडल के प्रभाव का आकलन करने के बाद इसे अन्य सरकारी संस्थानों या निकायों तक विस्तारित करने पर भी विचार कर सकती है।
नई व्यवस्था को प्रशासनिक सुधार और ऊर्जा प्रबंधन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जिससे सरकारी तंत्र में जवाबदेही और वित्तीय अनुशासन को बढ़ावा मिलेगा।